चमकी बुखार: बिहार सरकार ने SC में माना- राज्य में डॉक्टरों की कमी

चमकी बुखार: बिहार सरकार ने SC में माना- राज्य में डॉक्टरों की कमी

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बिहार के चमकी बुखार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार की ओर से हलफनामा दायर कर कहा कि स्वास्थ्य विभाग में मानव संसाधन की भारी कमी है। बिहार सरकार ने चमकी बुखार से मौत के मामले में अफसोस जाहिर किया और कहा कि स्वास्थ्य विभाग की मानव संसाधन की स्थिति ठीक नहीं है। डॉक्टर और नर्सों की भारी कमी बताई गई है। बिहार सरकार ने कहा है कि स्वास्थ्य विभाग में 47 फीसदी डॉक्टरों की कमी है। बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में कहा है कि सरकार इस बीमारी से निपटने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रही है।

बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर इस बात को कबूल किया कि बिहार में 47 फीसदी डॉक्टरों की कमी है। सुप्रीम कोर्ट ने चमकी बुखार से होने वाली मौतों के मामले को गंभीरता से लिया था और बिहार सरकार से अब तक उठाए गए कदम की जानकारी मांगी थी। बिहार सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि बिहार में डॉक्टरों की 47 फीसदी कमी है। साथ ही विभाग में 71 फीसदी नर्स की और 62 फीसदी लैब और 48 फीसदी फर्मासिस्ट के पद खाली हैं।

बिहार सरकार ने कहा कि मेडिकल ऑफिसर और पैरा मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति के लिए वह कारगर कदम उठाने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने 24 जून को बिहार सरकार और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा था। बिहार सरकार ने कहा है कि राज्य के सीएम खुद स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। राज्य सरकार ने सामाजिक और आर्थिक सर्वेक्षण के आधार पर बेहतर पोषण मुहैया कराने के लिए निर्देश दिया है।

बिहार के चमकी बुखार से बच्चों की मौत के मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और बिहार सरकार से कहा था कि वह बताए कि बच्चों की मौत को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक हफ्ते में बिहार सरकार से और केंद्र सरकार से कहा था कि वह 100 से ज्यादा बच्चों की मौत के मामले में जवाब दाखिल करें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ये मामला बेहद गंभीर है, इस तरह से मौत नहीं होने दी जा सकती हैं। अदालत ने कहा कि हम जवाब चाहते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में यूपी सरकार से भी जवाब दाखिल करने को कहा था कि वह दवाइयों की उपलब्धता, न्यूट्रिशन और साफ सफाई के स्थिति के बारे में भी जवाब दाखिल करे। अदालत ने कहा था कि हम इन तमाम मामलों पर जवाब चाहते हैं क्योंकि तमाम विक्टिम बच्चे हैं। अदालत ने केंद्र और बिहार सरकार को नोटिस जारी कर कहा था कि वह 7 दिनों के भीतर हलफनामा दायर करें।

इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के सामने सबसे पहले वकील मनोहर प्रताप ने उठाया था और जनहित याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी में कहा है कि बच्चे इसलिए मर रहे हैं क्योंकि उन्हें दवा मुहैया नहीं कराई जा रही है। उनकी सही तरह से देखभाल नहीं हो रही है। राज्य सरकार की विफलता के कारण इस तरह से बच्चे मरे हैं।

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