संविधान ने रोका नहीं तो यूपी में होतीं 93 लोकसभा सीटें

संविधान ने रोका नहीं तो यूपी में होतीं 93 लोकसभा सीटें

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 81 के तहत ऐसी व्यवस्था की गई कि प्रत्येक राज्य को लोकसभा में स्थानों का बंटवारा इस तरह से किया जाएगा कि स्थानों की संख्‍या से उस राज्य की जनसंख्‍या का अनुपात सब जगह लगभग बराबर हो। पर, अगर आज के संदर्भ में इन वास्तविक प्रावधानों को लागू किया जाता है तो देश के कई राज्यों में जबरदस्त रूप से बदलाव देखने को मिलेगा। इसके तहत जहां यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों में लोकसभा सीटें अचानक बढ़ जाएंगी, वहीं तमिनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तेलंगाना जैसे राज्यों को कई लोकसभा सीटें खोनी पड़ सकती हैं।

दरअसल, ऐसा इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि 1976 में आपातकाल के दौरान संविधान में 42वें संशोधन के तहत 1971 की जनगणना के आधार पर 2001 तक विधानसभाओं और लोकसभा की सीटों की संख्या को स्थिर कर दिया गया। उधर, 2001 में हुए 84वें संशोधन में लोकसभा और विधानसभा की सीटों में वर्ष 2026 तक कोई परिवर्तन न करने का प्रावधान किया गया।

Leave a Reply