ओवर थ्रो पर 6 नहीं, 5 रन थे? फैसले पर सवाल

ओवर थ्रो पर 6 नहीं, 5 रन थे? फैसले पर सवाल

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नई दिल्ली

इंग्लैंड ने वर्ल्ड कप के ‘फिल्मी’ फाइनल में न्यू जीलैंड को ‘बाउंड्री’ से हराकर पहली बार वनडे चैंपियन होने का गौरव हासिल किया। इस मैच को लेकर सबसे अधिक चर्चा गप्टिल के उस थ्रो की हो रही है, जिसने इंग्लिश ऑलराउंडर बेन स्टोक्स को हीरो बना दिया है। दरअसल, आखिरी ओवर में हुए इस ओवर थ्रो पर इंग्लैंड को 6 रन (दो रन दौड़कर, जबकि 4 रन बाउंड्री से) मिले। इस ओवर थ्रो ने इंग्लैंड के लिए संजीवनी का काम किया, जिसकी बदौलत उसने मैच को टाइ करा लिया। इसके बाद सुपर ओवर में भी मैच बराबरी पर छूटा और बाद में मैच के विजेता का फैसला बाउंड्री के दम पर हुआ, जहां इंग्लैंड ने पहली बार विश्व चैंपियन का ताज अपने नाम कर लिया।

इस थ्रो पर मिले 6 रन पर विवाद शुरू हो गया है। दरअसल, स्पोर्ट्स वेबसाइट ‘ESPN Cricinfo’ के अनुसार, इंग्लैंड को 5 रन दिए जा सकते थे, न कि 6 रन। 19.8 लॉ के अनुसार, फील्डर के हाथ से गेंद थ्रो होने से पहले बल्लेबाज अगर एक-दूसरे को क्रॉस कर चुके होते हैं और गेंद किसी वजह से बाउंड्री पार कर जाती है तो रन पूरा (दौड़ा हुआ रन और बाउंड्री से 4 रन) माना जाता है, लेकिन ऐसा नहीं होता है तो रन अधूरा ही माना जाएगा। इस वजह से अंपायरिंग पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

यूं समझें उदाहरण के तौर पर अगर फील्डर ने तब थ्रो किया जब बल्लेबाज दूसरे रन के लिए दौड़ रहे हैं और उन्होंने एक-दूसरे को क्रॉस नहीं किया है, जबकि गेंद किसी अन्य फील्डर से नहीं रुकी और बाउंड्री पार कर गई तो दौड़ा हुआ दूसरा रन काउंट नहीं होगा। यानी दौड़कर लिया हुआ सिर्फ एक रन ही माना जाएगा और बाउंड्री के 4 रन मान्य होंगे।

इसका मतलब इस मामले में बैटिंग टीम को 5 ही रन मिलेंगे (1 रन जो उन्होंने दौड़ कर पूरा कर लिया है और बाकी के 4 रन बाउंड्री से)। फाइनल मैच में अंपायरों ने यहां दूसरे रन को भी काउंट कर लिया, जो नियमों के मुताबिक सही नहीं है- जैसा कि दावा किया जा रहा है। दूसरी ओर, हां, अगर यहां फील्डर के गेंद थ्रो करने से पहले दोनों बल्लेबाजों एक-दूसरे को क्रॉस कर चुके होते, तो दूसरा रन भी मान्य होगा। यानी बैटिंग टीम को कुल 6 रन मिल जाएंगे।

पूर्व आईसीसी अंपायर साइमन टॉफेल की राय पूर्व आईसीसी अंपायर साइमन टॉफेल ने भी वर्ल्ड कप के फाइनल मैच में अंपायर की इस गलती पर अपनी राय रखी है। टॉफेल की गिनती आईसीसी के सर्वकालिक श्रेष्ठ इंटरनैशनल अंपायरों में होती है। वह क्रिकेट के नियम बनाने वाली संस्था एमसीसी की लॉ सब-कमिटी के सदस्य भी हैं।

अंपायर: साइमन टॉफेल (फाइल फोटो)
साल 2004 से 2008 के बीच लगातार 5 बार आईसीसी के अंपायर ऑफ द ईयर का पुरस्कार जीतने वाले टॉफेल ने फॉक्स स्पोर्ट्स ऑस्ट्रेलिया से मैच के इस पल पर बात करते हुए कहा, ‘उन्हें (अंपायरों) यहां 5 रन देने चाहिए थे, 6 नहीं।’ उसके बाद उन्होंने कहा कि ओवर थ्रो के इस चौके के बाद अगली गेंद (ओवर की 5वीं गेंद) का सामना आदिल रशीद को करना था। लेकिन यहां अंपायर ने इसे 2+4 रन दिए और स्टोक्स ने यह गेंद फेस की।

टॉफेल ने कहा, ‘दुर्भाग्य से समय-समय पर इस तरह की चीजें होती रहती हैं। जो खेल हम खेल रहे हैं वह इसका हिस्सा है।’ इस पूर्व अंपायर ने यहां कहा कि मैं यहां किसी पर दोष नहीं मढ़ना चाहता और उम्मीद करता हूं कि इस तरह की चीजें आगे कभी नहीं होंगी।

क्या हुआ था 50वें ओवर में (ट्रेंट बोल्ट: 14 रन, दो विकेट)-
करिश्माई सिक्स और गप्टिल का ओवर थ्रो: ट्रेंटबोल्ट को आखिरी ओवर में 15 रन बचाने की चुनौती मिली थी। ऐसे मोड़ पर स्टोक्स ने तीसरी गेंद पर छक्का जड़ा। बोल्ट की चौथी गेंद पर स्टोक्स ने दो रन लिए लेकिन मिडविकेट की तरफ से विकेटकीपर की तरफ फेंका गया गप्टिल का थ्रो स्टोक्स के बैट से टकराकर चार रन के लिए बाउंड्री के पार चला गया और इंग्लैंड को इस एक गेंद पर 6 रन मिल गए।

5वीं गेंद: अब आखिरी दो गेंदों पर इंग्लैंड को 3 रन चाहिए थे। बेन स्टोक्स ने यहां आदिल राशिद से काफी बातचीत की। जैसे ही गेंद को बेन स्टोक्स ने हल्के बल्ले से खेला, दोनों रन के लिए दौड़ पड़े। पहला रन पूरा किया, लेकिन दूसरा रन पूरा नहीं कर सके। सेंटनर के थ्रो पर बोल्ट ने राशिद को रन आउट कर दिया, लेकिन वह निराश थे। दरअसल, स्ट्राइक फिर स्टोक्स के पास थी और आखिरी गेंद पर दो रन चाहिए थे।

आखिरी गेंद: नए बल्लेबाज मार्क वुड से फिर स्टोक्स ने काफी बातचीत की, जैसी कि राशिद के साथ की थी। बोल्ट की चतुराई भरी गेंद को स्टोक्स ने बड़ा शॉट न खेलकर हल्के हाथ से लॉन्ग ऑन की ओर धकेल दिया और रन के लिए दौड़ पड़े। पहला रन पूरा हुआ, जबकि मार्क वुड अगला रन पूरा नहीं कर सके और रन आउट हो गए। मैच टाइ हो गया था।

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