70 साल बाद गांव में पहुंची बिजली, बल्ब निहारते रहे लोग!

70 साल बाद गांव में पहुंची बिजली, बल्ब निहारते रहे लोग!

- in भोपाल/ म.प्र
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भोपाल

कमलबती बारबार बल्ब को जलाती-बुझाती है, वो बल्ब को ऐसे निहारती है मानो वो कोई अजूबा हो. कोई उसकी खुशी का कारण पूछता है तो मुस्कुराकर बताती है कि लाइट आ गई, इसलिए वो खुश है. गांव में हर तरफ खुशी का माहौल है, महिलाएं, बच्चियां ढोल बजा रही हैं और गीत गाए जा रहे हैं. सतपुड़ा की दुर्गम पहाड़ियों के बीच बसा ये गांव इसलिए खुशी मना रहा है, क्योंकि आज़ादी के सत्तर साल बाद इस गांव ने लाइट को देखा. लाइट, जिसके बारे में वो अभी तक बस सुनते आए थे.

मध्यप्रदेश के खड़ई पंचायत के सांवरी गांव में लगभग 40 मकान हैं और 150 के करीब मतदाता. आदिवासियों के इस गांव में बिजली अपने साथ बहुत कुछ लेकर आई. भरिया आदिवासियों की नई, युवा पीढ़ी को इन दुर्गम पहाड़ियों से बाहर निकलने का मौका कम ही मिलता है. शहरों में विकास, सपने, महत्वकांक्षा जैसे शब्दों पर बात की जा सकती है पर गांव के बच्चों को विकास की परिभाषा नहीं आती. वो बस खुश हैं कि इतने सालों बाद ही सही बिजली आ गई.

गांव की एक महिला रामकुमारी बाई कहती हैं कि उन्होंने आज तक बिजली नहीं देखी. वो कहती हैं कि पहले रोजमर्रा के कामों में दिक्कत आती थी, सांप का भी डर रहता था पर अब सबकुछ ठीक हो जाएगा. रामकुमारी बाई कहती हैं,

मोमबत्ती और डिबरी जलाकर पढ़ने वाले बच्चों को लगता है कि अब वो पढ़ाई भी अच्छे तरीके से कर पाएंगे. बिजली के अभाव में जो बच्चे स्कूल छोड़ देते थे, उन्हें लगता है कि अब दुबारा से स्कूल जा सकेंगे. गांव की बच्चियों को लगता है कि अब अंधेरे की वजह से बाहर नहीं निकल पाने का उनका डर खत्म हो जाएगा और वो भी अब स्कूल जा सकेंगी. बिजली के खंबों में लदकर आई रोशनी, उनके जीवन को भी रौशन कर देगी.

प्रधानमंत्री मोदी की दीनदयाल ग्रामीण ज्योति योजना के तहत गांव में बिजली पहुंचाई गई. इस काम में 1 करोड़ 26 लाख रुपये की लागत आई. इलाके के विधायक, संजय शर्मा, इसे अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि बताते हैं और कहते हैं कि गांव में बिजली पहुंचने से उनका राजनीतिक जीवन सफल हो गया.

गांव में बिजली पहुंचाने का काम इतना आसान भी नहीं था, दुर्गम पहाड़ियों और जंगलों से घिरे होने की वजह से इसमें कई चुनौतियां आईं. मध्य प्रदेश बिजली विभाग के सीनियर इंजीनियर, अरविंद चौबे बताते हैं कि गांव में बिजली पहुंचाने के लिए विभाग ने कैसे दिन-रात एक कर दिए. बिजली के खम्बों को लगाने और उनके परिवहन की समस्या बेहद जटिल थी पर उन्होंने इस चुनौती को स्वीकार किया और असंभव को संभव कर दिखाया.

सीनियर इंजीनियर बताते हैं कि बिजली के आने से पानी और अन्य समस्याएं भी दूर होंगी. वो बताते हैं कि गांव में बिजली आने से पंप के कनेक्शन के भी आवेदन आने लगेंगे, टीवी भी आएगा और ये विकास के रास्ते में मील का पत्थर भी साबित होगा. सीनियर इंजीनीयर ये भी कहते हैं कि बिजली के आने से अब पीएम मोदी के मन की बात भी गांव में पहुंचेगी.

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