अनुच्छेद 370 खत्म: अक्साई चिन शामिल, ऐसा होगा नया लद्दाख

अनुच्छेद 370 खत्म: अक्साई चिन शामिल, ऐसा होगा नया लद्दाख

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करगिल

केंद्र सरकार ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर के विभाजन के फैसले को मंजूरी देते हुए अब जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में बांट दिया है। सरकार के नए फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में गठित किया गया है। माना जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर से विभाजित होने के बाद लद्दाख को अब विकास की दिशा में नई गति मिल सकेगी और यहां के लोगों के लिए नई संभावनाओं का जन्म हो सकेगा। इससे पहले लद्दाख जम्मू-कश्मीर का हिस्सा था और इसी साल जम्मू-कश्मीर की राज्य सरकार ने इसे एक अलग डिविजन के रूप में मान्यता दी थी।

बौद्ध और शिया मुस्लिमों की बाहुल्यता वाला लद्दाख संभाग अब तक विकास की संभावनाओं से वंचित रह जाता था। लेकिन सरकार ने अब अपने नए फैसले के तहत लद्दाख को एक केंद्र शासित प्रदेश के रूप में मान्यता दी है, जिसकी अपनी कोई विधानसभा नहीं होगी। लद्दाख की गतिविधियों का संचालन अब उपराज्यपाल के माध्यम से होगा और इसपर केंद्र सरकार का प्रभाव होगा। लद्दाख के लोग अब विधानसभा चुनाव में वोट नहीं दे पाएंगे, हालांकि यहां के लोगों को लोकसभा चुनाव में वोटिंग का अधिकार होगा। इसके अलावा इस हिस्से में कानून व्यवस्था समेत तमाम महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णय का अधिकार भी केंद्र सरकार के ही पास होगा।

“केंद्र शासित राज्य के लिए बहुत समय से लद्दाख क्षेत्र की मांग थी। इस मांग के तहत जम्मू कश्मीर में दो केंद्र शासित प्रदेश लेकर आ रहे हैं। एक लद्दाख होगा, जिसमें अक्साई चिन भी समाहित होगा। वहां दोनों हिल काउंसिल चालू रहेंगी। हिल काउंसिल के चेयरमैन को मिनिस्टर का दर्जा रहेगा। जिससे स्थानीय नुमाइंदों की पूरी आवाज हिल काउंसिल के अंदर सुनाई देगी और किसी के लोकतांत्रिक अधिकारों के कम होने का सवाल नहीं है।”-केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह

बौद्ध और मुस्लिम लोगों की बड़ी संख्या
सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कहे जाने वाले लद्दाख में करगिल और लेह दो जिले हैं। इस इलाके में मुस्लिमों और बौद्ध लोगों की बड़ी संख्या है। हिमालय और काराकोरम पर्वत श्रृंखला के बीच में स्थित लद्दाख की जनसंख्या 2 लाख 70 हजार के आसपास है। करगिल में मुस्लिमों की संख्या अधिक है, जबकि लेह में 60 फीसदी से अधिक बौद्ध समुदाय के लोग हैं। अब तक लद्दाख अपने विकास के लिए जम्मू कश्मीर राज्य सरकार पर निर्भर था। लेकिन, यूनियन टेरिटरी बनने के बाद अब केंद्र सरकार लद्दाख के विकास पर अधिक फोकस कर पाएगी। हालांकि, विधानसभा न होने के चलते लद्दाख के लोग केवल लोकसभा चुनाव में वोट कर पाएंगे।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा वाला तीसरा केंद्र शासित प्रदेश
गौरतलब है कि मौजूदा समय में सिर्फ दिल्ली और पुदुचेरी में विधानसभा हैं, लेकिन अब जम्मू-कश्मीर भी विधानसभा वाला तीसरा केंद्र शासित प्रदेश हो जाएगा। आपको बता दें कि विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों में केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में राज्यपाल की जगह उपराज्यपाल होते हैं। वहीं, केंद्र शासित प्रदेशों से संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के लिए सदस्य भी चुने जाते हैं। वह बात अलग है कि इनकी संख्या हर राज्य में अलग-अलग होती है। सांसदों की संख्या के लिहाज से दिल्ली नबंर एक पर है। संसद में दिल्ली का प्रतिनिधित्व 7 लोकसभा और 3 राज्यसभा सदस्य करते हैं।

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