स्पेस में चीन की ताकत से टेंशन में अमेरिका, भारत का अपना प्लान

स्पेस में चीन की ताकत से टेंशन में अमेरिका, भारत का अपना प्लान

हॉन्ग कॉन्ग

अपनी विस्तारवादी और आक्रामक नीतियों की वजह से चर्चा में रहने वाला चीन अब अंतरिक्ष में अपनी सैन्य शक्ति बढ़ा रहा है। चीनी सेना अलग से कई मिलिटरी यूनिटों को बना चुकी है, जिन्हें अंतरिक्ष में हमलों के लिए खास तौर पर प्रशिक्षित किया गया है। स्पेस वॉर को ध्यान में रखते हुए चीन के इन सैन्य कार्यक्रमों पर अमेरिका ने चिंता जताई है। वहीं, भारत भी अंतरिक्ष में दुश्मनों के किसी भी नापाक इरादे को नाकाम करने की क्षमता विकसित करने के कई विकल्पों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। इनमें डायरेक्टेड एनर्जी वेपंस (DEWs) और को-ऑर्बिटल किलर्स की मौजूदगी के साथ-साथ अपने उपग्रहों को इलेक्ट्रॉनिक या फिजिकल अटैक्स से बचाने की क्षमता पैदा करने जैसे उपाय शामिल हैं। बीते दिनों A-SAT की परीक्षण तो बस बानगी भर है।

यूनाइटेड स्टेट्स डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में अंतरिक्ष में चीन द्वारा सैन्य शक्ति बढ़ाने के हालिया कार्यक्रमों पर रोशनी डाली गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) अंतरिक्ष में हमलों के लिए प्रशिक्षित मिलिटरी यूनिटों को बना चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन हाई अर्थ ऑर्बिट (HEO) में 37,000 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर मार कर सकने वाली मिसाइलों का परीक्षण कर सकता है।

बता दें कि भारत ने बीते दिनों एक ऐंटी-सैटलाइट मिसाइल का सफल परीक्षण किया था। भारत ने ‘मिशन शक्ति’ के तहत लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में करीब 300 किलोमीटर ऊंचाई पर स्थित अपने एक लाइव सैटलाइट को मार गिराया था। माना जा रहा है कि भारतीय ऐंटी-सैटलाइट मिसाइल की रेंज 1000 किलोमीटर से ज्यादा है।

DIA की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि चीन 2007 से ही अंतरिक्ष से अमेरिका और यूरोपियन देशों की जासूसी में शामिल है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है, ‘पीएलए की यूनिट 2007 से ही अमेरिका और यूरोपियन सैटलाइट ऐंड ऐरोस्पेस इंडस्ट्रिज के खिलाफ साइबर जासूसी में शामिल रहा है।’ रिपोर्ट के मुताबिक चीन बलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) सिस्टम भी विकसित कर रहा है, जिनमें सैटलाइटों की अहम भूमिका रहती है। चीन ने 5 फरवरी 2018 को सफल BMD टेस्ट किया था। वह 2010 से ही BMD का परीक्षण कर रहा था।

‘मिशन शक्ति’ के साथ ही भारत अंतरिक्ष में सैटलाइट को मार गिराने की क्षमता वाला चौथा देश बन गया। बाकी 3 देश हैं- अमेरिका, रूस और चीन। चीन 2007 में ही A-SAT का परीक्षण कर चुका था। उसके ऐंटी-सैटलाइट मिसाइलों की रेंज 37,000 किलोमीटर तक है। A-SAT परीक्षण से अंतरिक्ष में सैटलाइटों को मलबे से कोई खतरा न हो, इसलिए भारत ने लो अर्थ ऑर्बिट में करीब 300 किलोमीटर की ही ऊंचाई पर परीक्षण किया। ऊंचाई कम होने की वजह से मलबा वातावरण में ही नष्ट हो जाएगा। भारत के रक्षा संगठन DRDO (डिफेंस रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट ऑर्गनाइजेशन) के मुताबिक A-SAT परीक्षण से पैदा हुआ मलबा 45 दिनों में नष्ट हो जाएगा। दूसरी तरफ, चीन ने 2007 में काफी ऊंचाई पर A-SAT परीक्षण किया था, जिससे पैदा हुआ मलबा आज भी अंतरिक्ष में मौजूद है, जो काफी खतरनाक है।

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