धरती पर गिरने वाला है चीन का स्पेस स्टेशन, भारत पर भी खतरा!

धरती पर गिरने वाला है चीन का स्पेस स्टेशन, भारत पर भी खतरा!

आसमान में जो चढ़ेगा उसका नीचे गिरना तो तय ही है, लेकिन मुसीबत तब आती है, जब उस गिरने वाले के नीचे दबकर मरने का खतरा पूरी दुनिया पर मंडराने लगे. चीन का एक स्पेस स्टेशन काम करना बंद कर चुका है. अब कहा जा रहा है कि आने वाले अप्रैल में, यानी अगले ही महीने यह अपनी ऑर्बिट यानी परिक्रमापथ से निकलकर धरती पर आ गिरेगा. जब से यह खबर सामने आई है, लोगों में डर का पैदा होना सामान्य सी बात है. डर इस बात का कि कहीं इस गिरने वाले 8000 किलो के धातु से बने स्पेस स्टेशन के नीचे दबकर धरती के कई हिस्से तबाह हो सकते हैं. डर इस बात का भी कि खतरे की तय की गई सीमा में भारत भी खतरे के निशान के में ही शामिल है!

चीन का स्पेस स्टेशन टियेंगॉंग-1 को 29 सितंबर 2011 में स्पेस में भेजा गया था. 18000 पाउंड यानी करीब 8000 किलोग्राम का यह स्पेस स्टेशन चीन का पहला प्रोटोटाइप स्पेस स्टेशन है. मंडेरिन भाषा में ‘टियेंगॉंग’ का मतलब होता है ‘स्वर्ग का महल’. यानी जब CNSA (चाइना नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन) ने इसे लॉन्च किया था, इसे महल जैसा बनाने की कोशिश की थी.

सिर्फ 7 सालों में भटक गया अपना रास्ता:
इस स्पेस स्टेशन ने 2013 में अपना ऑर्बिट छोड़ना शुरू कर दिया. चीन के वैज्ञानिकों ने NASA से मदद ली और इसे वापस ऑर्बिट में पहुंचाने की कोशिशें की गईं, लेकिन 2016 में आखिरकार वैज्ञानिकों ने मान ही लिया कि यह स्पेस स्टेशन अपना रास्ता भटक ही गया है और वापस इसे इसके सही रास्ते पर लाना संभव नहीं है. अब जो रास्ते से भटक गया है, उसका गिरना तो तय ही है. 2018 के जनवरी में पाया गया कि अब बहुत दिन नहीं, जब यह स्पेस स्टेशन धरती से आ मिलेगा.

वैज्ञानिक अभी तक तय नहीं कर पाए हैं कि इस स्पेस स्टेशन के अवशेष कहां गिरेंगे. साथ ही यह भी अभी पता नहीं चल पाया है कि अप्रैल महीने की किस तारीख को कितने बजे ये टुकड़े आसमान से गिरेंगे. फिलहाल वैज्ञानिकों को इतना भर पता है कि ये टुकड़े 43 डिग्री पूर्वी लेटिट्यूड से 43 डिग्री दक्षिणी लेटिट्यूड के बीच में गिरेंगे.

NASA द्वारा रिलीज किए गए नक्शे के हिसाब से दुनिया के मध्य और दक्षिणी हिस्से में इस स्पेस स्टेशन के गिरने की संभावनाएं हैं. आप जो मैप नीचे देख रहे हैं, उसमें मौजूद काली पट्टी वाले हिस्से में इस स्पेस स्टेशन के अवशेष गिरने की सबसे ज्यादा संभावना है. वहीं इन दोनों काली पट्टियों के बीच का हिस्सा कम ही सही लेकिन खतरे में है.

टियेंगॉंग-1 पृथ्वी से 290 किलोमीटर ऊपर स्थापित है और 28,000 किमी/घंटे की गति से पृथ्वी के चक्कर काट रहा है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके गिरने से डरने की कोई बात नहीं है. टेक्निकल खामियों और इतनी तीव्र गति से परिक्रमा करने की वजह से इस स्पेस स्टेशन का अधिकतर हिस्सा जल चुका है. वहीं धरती पर गिरने से पहले ही इस स्पेस स्टेशन के टुकड़े-टुकड़े हो जाएंगे. यानी जो हिस्सा धरती पर गिरने से पहले बदकिस्मती से आपको छू भी गया तो उसका साइज एक छोटे से कंकड़ से बड़ा नहीं होगा.

एरोस्कोप एनालिसिस के हिसाब से, आसमान से गिरने वाले इन टुकड़ों से चोट खाने वालों की संख्या 1 लाख करोड़ में एक से भी कम है. वैज्ञानिक विलियम एलोर ठिठोली करते हुए कहते हैं कि इससे ज्यादा संभावना तो किसी की बिजली चमकने से घायल होने की है.

चीन का कहना है कि इस स्पेस स्टेशन का गिरना एक नियंत्रित प्रोग्राम है. चाइनीज स्पेस स्टेशन के एक प्रमुख वैज्ञानिक ने पहले कहा था कि सब कुछ उनके नियंत्रण में है, लेकिन अब अपने बयान से पलटते हुए उन्होंने माना कि हो सकता है टियेंगॉंग अनियंत्रित रूप से पृथ्वी पर आ गिरे. लेकिन क्या यह पहला ऐसा स्पेस ऑब्जेक्ट होगा जो किसी वजह से पृथ्वी पर आ गिरेगा?

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