वोट डालने राजगढ़ नहीं पहुंचे दिग्विजय सिंह, मांगी माफी

वोट डालने राजगढ़ नहीं पहुंचे दिग्विजय सिंह, मांगी माफी

- in भोपाल/ म.प्र
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भोपाल

मध्य प्रदेश की भोपाल लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह अपने गृहक्षेत्र राजगढ़ में वोट डालने नहीं पहुंच सके। इस बारे में दोपहर के समय दिग्विजय ने कहा कि वह मताधिकार का प्रयोग करने की ‘कोशिश’ करेंगे लेकिन देर शाम उन्होंने मतदान न कर पाने की पुष्टि करते हुए कहा कि वह वोट डालने राजगढ़ नहीं जा सके और इसके लिए वह माफी मांगते हैं।

दिग्विजय ने कहा कि अगली बार वह अपना नाम भोपाल में रजिस्टर कराएंगे। राजगढ़ संसदीय सीट पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के प्रभाव वाली सीट मानी जाती है। यही कारण है कि दिग्विजय सिंह इस सीट से चुनाव लड़ना चाह रहे थे लेकिन पार्टी ने उन्हें भोपाल भेज दिया। कांग्रेस ने यहां से मोना सुस्तानी को उम्मीदवार बनाया है। मोना सुस्तानी दिग्विजय सिंह की विश्वस्त सहयोगी मानी जाती हैं। भोपाल से करीब 140 किमी उत्तर-पश्चिम में और राजस्थान से लगी राज्य की सीमा पर मालवा पठार में स्थित राजगढ़ में बीजेपी ने शिवराज सिंह चौहान के विश्वस्त और मौजूदा सांसद रोडमल नागर को पार्टी कार्यकर्ताओं के विरोध के बावजूद फिर से उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में यहां राज्य के दो मुख्यमंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर है। इन सबके बीच दिग्विजय का अब तक राजगढ़ न पहुंचना मोना के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।

राजनीति विश्लेषकों का मानना है कि राजगढ़ से दिग्विजय के कई करीबी कार्यकर्ता भी भोपाल में चुनाव प्रचार में लगे हैं। इन कार्यकर्ताओं के साथ अगर दिग्विजय राजगढ़ आते तो स्थानीय वोटरों पर कांग्रेस के पक्ष में कुछ सकारात्मक प्रभाव जरूर पड़ता। राजगढ़ में करीब 15 लाख मतदाता हैं। पिछले साल नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में इस लोकसभा क्षेत्र में 8 विधानसभा सीटों में कांग्रेस ने पांच सीट और बीजेपी ने दो सीट पर जीत हासिल की थी जबकि एक सीट निर्दलीय के खाते में गई थी।

आपको बता दें कि राजगढ़ सीट कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के राघोगढ़ क्षेत्र में पड़ती है और वह खुद दो बार इस सीट का संसद में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं जबकि उनके भाई लक्ष्मण सिंह कांग्रेस के टिकट पर 5 बार और बीजेपी के उम्मीदवार के तौर पर एक बार यहां से निर्वाचित हुए। नागर ने साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर 2 लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। लोग उनकी इस जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित लहर को देते हैं।

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