मात्र 5 हजार रुपए में बनी है यह फिल्म, शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल के फाइनल में पहुंची

मात्र 5 हजार रुपए में बनी है यह फिल्म, शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल के फाइनल में पहुंची

- in ग्लैमर
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नई दिल्ली

0011-300x200फिल्म बनाना किसे अच्छा नहीं लगता, लेकिन जैसे ही उसकी लागत की बात आती है, लोगों के पसीने छूटने लगते हैं। लेकिन, एक फिल्म ऐसी भी है जो सिर्फ पांच हजार रुपए में बनकर तैयार हुई है। हम बात कर रहे हैं शॉर्ट फिल्म ‘तुरूप चाल’ के बारे में। यह फिल्म कैसी है इसका पता तो देखने के बाद चलेगा, लेकिन अपनी खासियत के कारण इस फिल्म ने जियो फिल्मफेयर शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल के फाइनल में शामिल 44 फिल्मों में जगह बना लिया है।

जियो फिल्मफेयर शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल में ‘तुरूप चाल’ के अलावा मनोज बाजपेई, टिस्का चोपड़ा, आलोक नाथ, दीपक डोबरियाल, स्वानंद किरकिरे, आदिल हुसैन और राधिका आप्टे जैसे प्रतिष्ठित अभिनेताओं की भी फिल्में शामिल हैं। ‘तुरूप चाल’ इस लिए भी खास हो जाती हैं, क्योंकि इसे मात्र 5 हजार रूपए के बजट में साधारण से कैमरे से शूट किया गया है। इस फिल्म को अब तक एक लाख 72 हजार व्यूज मिल चुके हैं। व्यूज के मामले में पहले नंबर पर सनी लियोनी, आलोक नाथ और दीपक डोबरियाल की फिल्म ‘11 मिनिट’ चल रही है।

‘तुरूप चाल’ को लेकर इस फिल्म के अभिनेता अनूप गोसांई कहते हैं कि हमारी फिल्म सीमित बजट में तैयार हुई है। वो बताते हैं कि इसे उन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर बनाया है। महज 15 दिन में पूरी फिल्म बनकर तैयार हुई है। इस फिल्म में केवल 5 किरदार हैं। फिल्म का निर्देशन सुमित कुमार ने किया है और फिल्म न्यू प्रोपेगेंडा मोशन पिक्चर के बैनर तले बनी है और व्यूज के मामले में दूसरी पोजीशन पर पहुंच चुकी है।

क्या है इस फिल्म की कहानी
तुरूप चाल की कहानी एक कॉमन मैन, एक फायनेंसर और पुलिसवाले के इर्द-गिर्द घूमती है। एक आदमी जो ईमानदारी से जीना चाहता है, लेकिन परिस्थितियां उसके खिलाफ हैं। वो घर से अपने लोन की रकम चुकाने निकलता है और जब फायनेंसर के पास पंहुचता है तब तक उसके पैसे चोरी हो जाते हैं। इसके बाद इस कहानी में एक पुलिसवाले की एंट्री होती है। फायनेंसर और पुलिसवाला उसे जलील करते हैं। एक सीन में नकली रसीद लेने के सवाल पर कॉमन मैन कहता है- ‘पक्की लेता तो दस फीसदी देना पड़ता और …क्या सारे देशभक्ति की जिम्मेदारी मेरी ही है?’ ऐसे सवाल आम आदमी के जेहन में अक्सर आ ही जाते हैं? फिल्म एक अनएक्सपेक्टेड क्लाइमैक्स के साथ खत्म होती है।

पीपुल्स च्वाइस अवॉर्ड
इस कॉम्पीटीशन को 5 कैटेगरीज में बांटा गया है। बेस्ट मूवी फिक्शन, बेस्ट मूवी नॉन फिक्शन, बेस्ट एक्टर मेल, बेस्ट एक्टर फीमेल और पीपुल्स च्वाइस। फिल्म की स्टार कास्ट को पीपुल्स च्वाइस अवॉर्ड से उम्मीदें हैं। इस उम्मीद के पीछे मेकर्स अपनी फिल्म के बजट, कहानी और रियलिस्टक अप्रोच को मानते हैं। फिल्म कुछ दोस्तों ने नौकरीपेशा जिंदगी से वक्त निकालकर बनाई है। मसलन फिल्म में कॉमन मैन की भूमिका निभाने वाले अनूप गोंसाई लंबे समय से उत्तराखंड में रंगमंच में सक्रिय हैं। फिलहाल वे ‘किंगडम ऑफ ड्रीम्स’ में काम कर रहे हैं। ‘किंगडम ऑफ ड्रीम्स’ भारत का पहला म्यूजिकल थियेटर कॉन्सेप्ट पर बेस्ड है, जिसके गुडगांव में नियमित शोज होते हैं। ऐसे ही फिल्म में फायनेंसर का किरदार अदा करने वाले बरेली निवासी विजय श्रीवास्तव भी किंगडम ऑफ ड्रीम्स में ही काम करते हैं। वो कहते हैं कि भारी-भरकम सितारों के बीच इस फिल्म को लोग ऑनलाइन वोट देकर भी पीपुल्स च्वाइस अवॉर्ड में आगे बढ़ा सकते हैं।

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