खुशखबरी: यूनिवर्सिटीज के एडहॉक टीचर होंगे परमानेंट, UGC ने दिए ये निर्देश

खुशखबरी: यूनिवर्सिटीज के एडहॉक टीचर होंगे परमानेंट, UGC ने दिए ये निर्देश

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नई दिल्ली,

कॉलेजों में एडहॉक में पढ़ा रहे टीचर्स के लिए ये खुशी की खबर है. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के सचिव प्रो. रजनीश जैन ने देशभर के सभी केंद्रीय, राज्य व डीम्ड विश्वविद्यालयों को पत्र लिखकर सूचित किया है कि 4 जून 2019 को विश्वविद्यालयों/कॉलेजों और डीम्ड विश्वविद्यालयों में स्थायी नियुक्ति हेतु दिशा निर्देश जारी किए गए थे. पत्र में कहा गया था कि दी गई निश्चित समय सीमा के अंदर सभी रिक्त पदों को भरा जाये ताकि उच्च शैक्षणिक संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा पर दुष्प्रभाव ना पड़े. इसी संदर्भ में उन्होंने पुनः सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश देते हुए सूचित किया है कि दिशा निर्देशों में दी गई समय सीमा के अंदर सभी नियुक्तियां की जाएं.

150 पद भरने के बाद बंद हो गई थी प्रक्रिया
दिल्ली यूनिवर्सिटी की एकेडेमिक काउंसिल के पूर्व सदस्य प्रो. हंसराज ‘सुमन’ ने बताया है कि यूजीसी विश्वविद्यालयों/कॉलेजों को स्थायी नियुक्ति संबंधी कई बार सर्कुलर जारी कर चुका है. दिल्ली विश्वविद्यालय ने यूजीसी के निर्देशों का पालन करते हुए अपने विभागों और कॉलेजों ने 4500पदों को भरने के लिए विज्ञापन निकाले थे लेकिन लगभग 150 पदों पर नियुक्ति करने के बाद यह प्रक्रिया बंद कर दी गई.

ये है यूजीसी का पत्र
इसीलिए यूजीसी ने पुनः निर्देश दिया है कि सभी विश्वविद्यालय और कॉलेज ये सुनिश्चित करें कि सभी रिक्त पद त्वरित रूप से भरें. इस संदर्भ में सरकार की आरक्षण नीति तथा सभी ब्यौरे यूजीसी की वेबसाइट पर अपलोड कर दिए गए हैं. उनका कहना है कि यूजीसी ने कहा है कि कृपया उन निर्देशों का पालन करते हुए आश्वस्त करे कि खाली पद भर दिये जायेंगे और नियुक्ति प्रक्रिया जल्द आरम्भ करें.

लंबे समय से परेशान हैं हजारों एडहॉक टीचर
प्रो. सुमन ने कहा कि शिक्षकों के खाली पदों को न भरे जाने के कारण विश्वविद्यालय/कॉलेज की उच्च शिक्षा पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है. साथ ही यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में बड़ी संख्या में पढ़ा रहे एडहॉक शिक्षकों के सामने भी स्थायी न हो पाने की समस्या है.

यही नहीं विश्वविद्यालयों/कॉलेजों में शिक्षकों व छात्रों के अनुपात का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है. सरकार की ओर से तमाम स्तर पर आरक्षण नीतियों जैसे हाल ही में ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू करने से छात्रों की संख्या में बढ़ोतरी हो गई है. इसके मुकाबले शिक्षकों की संख्या पहले से भी कमतर हो गई है ऐसी स्थिति में जबकि नए छात्र-छात्राएं अपने करियर को बनाने उच्च शिक्षा में प्रवेश लेना चाहते हो और शिक्षकों की अपर्याप्त संख्या जैसे उनके भीतर कुंठा पैदा करती है और निराशा बनाती है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक और आर्थिक स्तर पर यदि ये युवा भागीदार नहीं बनेंगे तो राष्ट्र का नुकसान ही होगा.

सरकार को चाहिए कि जितनी जल्दी हो सके इसी शैक्षिक सत्र में नियुक्तियों को सम्पन्न करे और गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के राह की बाधाएं दूर करे. उन्होंने बताया है कि सरकार की नीतियों और यूजीसी के निर्देशों से लगता है कि बार-बार आशा की किरण दिखलाई जाती है किंतु उसका कोई सुखद परिणाम देखने को नहीं मिल रहा है. घोर निराशा के ऐसे समय में शिक्षकों की बहाली वहां उनके अंदर आत्मविश्वास पैदा करेगी वहीं सकारात्मक शिक्षा का विस्तार भी सम्भव होगा.

सिर्फ डीयू में 5000 एडहॉक टीचर
प्रो. सुमन ने बताया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय में एडहॉक शिक्षकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. इस समय डीयू कॉलेजों में लगभग 5 हजार एडहॉक शिक्षक है इसके अलावा विभागों में 700 शिक्षक एडहॉक है. पिछले साल लॉ फैकल्टी, एजुकेशन डिपार्टमेंट और फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज के अतिरिक्त दौलतराम कॉलेज के एक विभाग में नियुक्ति के बाद रोक लग गई. उनका कहना है कि यदि इस बार यूजीसी दिशा निर्देशों को जो कॉलेज पालन ना करें उनका अनुदान बंद कर देना चाहिए ताकि वह नियुक्ति प्रक्रिया न रोक सके.

विभागों में विज्ञापन निकाले गए
प्रो. सुमन ने बताया है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी ने अपने यहां विभागों में सहायक प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर के पदों का विज्ञापन निकाला है. कॉलेजों ने अपने यहां पदों के विज्ञापन निकालने के लिए रोस्टर पास करा लिया है, जल्द ही कॉलेज अपने-अपने कॉलेजों में खाली पड़े पदों को भरने के लिए विज्ञापन निकालेंगे. उन्होंने बताया है कि जिस तरह से विज्ञापन निकाले जा रहे हैं, उससे लगता है कि सितम्बर माह से स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो जाएंगी. उन्होंने यूजीसी को धन्यवाद देते हुए कहा है कि जो कॉलेज जल्द से जल्द पदों के विज्ञापन न निकालें और उसे वेबसाइट पर पदों की सूचना न दें, उसका अनुदान बंद कर दें.

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