भारत 2024 तक 5 हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था कैसे बन सकता है?

भारत 2024 तक 5 हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था कैसे बन सकता है?

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नई दिल्ली,

राज्य के मुख्यमंत्रियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वे 2024 तक भारत को 5 ट्रिलियन यानी 5 हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना चाहते हैं. भारतीय अर्थव्यवस्था फिलहाल करीब 190 लाख करोड़ (मौजूदा दर के अनुसार जीडीपी, 2018-19) की है. डॉलर में बदलने पर इसका औसत मूल्य करीब 2.8 ट्रिलियन डॉलर बैठता है. इसका मतलब है कि अगले पांच साल में भारतीय अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए लगभग दोगुनी होना होगा.

क्या 5 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य वास्तविक है? अगर डॉलर के संदर्भ में देखें तो दो मुख्य कारक ऐसे हैं जो भारत की विकास दर के इस लक्ष्य तक पहुंचने को प्रभावित कर सकते हैं:

1. महंगाई दर
2. रुपया और डॉलर की विनिमय दर

महंगाई दर बढ़ने का का अर्थ है कि वस्तुओं के दाम बढ़ेंगे. महंगाई दर में बढ़ोत्तरी के साथ रुपये की क्रय शक्ति घटेगी, जो उपभोग घटा देगी और जीडीपी ग्रोथ पर नकारात्मक असर पड़ेगा.

भारत में महंगाई (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) नियंत्रित रही है और अगस्त 2018 से 4% के आसपास ही रह रही है. पिछले महीने यह 3.05% दर्ज की गई. इसी तरह, 5 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए रुपया और डॉलर की विनिमय दर को भी नियंत्रण में रखना होगा. अगर आगे चलकर रुपये का मूल्य घटता है तो डॉलर के संदर्भ में यह भारत की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर डालेगा, लेकिन अगर डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत होता है तो इससे इस लक्ष्य तक पहुंचना आसान हो जाएगा.

आनंद राठी सिक्योरिटीज के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर और चीफ इकोनॉमिस्ट सुजन हाजरा कहते हैं, ‘भारत में महंगाई दर 3% से ऊपर है और ग्लोबल महंगाई भी बहुत ज्यादा नहीं है. महंगाई दर अनुकूल दिख रही है और यहां तक कि ग्लोबल महंगाई दर कोई ऐसा संकेत नहीं दे रही है कि मूल्यों में बढ़ोत्तरी होगी. यह भारत की डीजीपी ग्रोथ को 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने में मदद करेगा. यह लक्ष्य अवास्तविक बिल्कुल नहीं है अगर रुपया कमजोर न हो.’

5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था मुश्किल नहीं…
भारतीय अर्थव्यवस्था सही रास्ते पर है. डॉलर में देखा जाए तो 1996 में भारत की नॉमिनल जीडीपी 388 बिलियन डॉलर थी, अगले दस साल में यानी 2006 में यह दोगुने से भी ज्यादा 920 बिलियन डॉलर हो गई. अगले दस साल यानी 2016 में यह फिर से दोगुने से ज्यादा होकर 2.3 ट्रिलियन पहुंच गई, इसलिए भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना को मुश्किल काम नहीं है.

यह लक्ष्य पूरा करने के लिए भारत को अगले पांच सालों तक सालाना औसत वृद्धि दर डॉलर के संदर्भ में 11.5% रखनी होगी. रुपये के संदर्भ में देखा जाए तो 2018-19 में भारत की जीडीपी ग्रोथ में गिरावट आई है. पिछले वित्त वर्ष के 7.2% के मुकाबले फिलहाल यह 6.8% है. अप्रैल, 2019 में अंतरराष्ट्री मुद्रा कोष (IMF) ने 2019-20 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 20 बिंदुओं के आधार पर घटा दिया है. इसके मुताबिक 2019-20 में यह 7.3% और 2020-21 में 7.5% रहेगी.

आईएमएफ की ही तरह एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) और रिजर्व बैंक आफ इंडिया (आरबीआई) ने भी यह अनुमान ​घटा दिया है. एडीबी ने भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.2% रहने का अनुमान जताया है जो कि पहले 7.6% था, जबकि आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी ने भी हाल ही में 2019-20 के लिए भारत की डीजीपी दर का अनुमान 7.2% से घटाकर 7% कर दिया है.

भारत की वास्तविक जीडीपी ग्रोथ के बारे में रुपये में जो 7.5% का अनुमान लगाया है, वह अगले पांच साल तक जारी रहा तो यह 2024 तक 5 ट्रिलियन डॉलर के पार चली जाएगी. ‘5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य के ​लिए नॉमिनल जीडीपी के संदर्भ में देखें तो यदि वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 7-7.5% रहती है तो 4-4.5% महंगाई दर के हिसाब से नामिनल ग्रोथ 11.5% होनी चाहिए.’

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