बायोमैट्रिक्स डेटाबेस से मृतक की पहचान संभव नहीं: UIDAI

बायोमैट्रिक्स डेटाबेस से मृतक की पहचान संभव नहीं: UIDAI

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नई दिल्ली,

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) यूआईडीएआई ने दिल्ली हाई कोर्ट को जानकारी दी है कि किसी मृत व्यक्ति के फिंगरप्रिंट का मिलान उसके डेटाबेस में संरक्षित बायोमैट्रिक्स से करना संभव नहीं है. चूंकि आधार के पास तकरीबन 120 करोड़ लोगों का डाटा है और बिना आधार नंबर जाने किसी अज्ञात मृत व्यक्ति की उंगलियों के निशान से उसकी पहचान करना तकनीकी रूप से यूआईडीएआई के लिए संभव ही नहीं है.

दरअसल दिल्ली हाई कोर्ट एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें केंद्र सरकार और यूआईडीएआई को आधार बायोमैट्रिक्स का इस्तेमाल, अज्ञात मृतकों की पहचान के लिए करने के निर्देश देने को कहा गया है. हालांकि यूआईडीएआई के जवाब से हाई कोर्ट पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखा, लिहाजा कोर्ट ने यूआईडीएआई को अपना विस्तृत जवाब कोर्ट में दाखिल करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा है कि इस जवाब में यह बताया जाए कि आखिर आधार के डेटाबेस सिस्टम से फिंगरप्रिंट का मैच क्यों नहीं किया जा सकता? दिल्ली हाई कोर्ट ने नेशनल क्राईम रिकॉर्ड्स ब्यूरो से भी इस मामले में जवाब दाखिल करने को कहा है.

इस याचिका में कहा गया है कि गुमशुदा लोगों के साथ-साथ मृत व्यक्तियों की पहचान करने के लिए आधार के डेटाबेस का इस्तेमाल फिंगरप्रिंट्स के माध्यम से किया जा सकता है. हालांकि यूआइडीएआई का कहना है कि व्यवहारिक और तकनीकी रूप से यह संभव नहीं है. यूआईडीएआई का कहना है कि डेटाबेस से सिर्फ एक अंगूठे से पहचान संभव नही है, उसके फिंगरप्रिंट्स के लिए दोनों हाथों और रेटिना की जरूरत पड़ती है.

गौरतलब है कि देश में हर साल अज्ञात मृत शव हजारों की तादाद में अलग अलग जगहों पर मिलते हैं और शिनाख्त के अभाव में इन शवों को ऐजेंसी और पुलिस उनके परिवारों को सौंप ही नहीं पाते, क्योंकि समय पर पता ही नहीं चल पाता कि इस शव किसका है. ऐसे में निश्चित रूप से अगर कोई ऐसी तकनीक विकसित कर ली जाए जिससे 120 करोड़ लोगों का आधार डाटा बेस इस्तेमाल करके शवों की शिनाख्त हो सके, तो इससे कई अपराधिक घटनाओं की गुत्थी सुलझाने में तो मदद मिलेगी ही साथ ही परिवारों को शव सौंपने में भी आसानी होगी.

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