जरुरत पड़ने पर अब एक से दूसरे राज्य ले जा सकेंगे ब्लड

जरुरत पड़ने पर अब एक से दूसरे राज्य ले जा सकेंगे ब्लड

- in भोपाल/ म.प्र
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भोपाल

blood_stored_28_12_2015-300x225प्रदेश के किसी भी जिले में अब जरुरत पड़ने पर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र व अन्य पड़ोसी राज्यों के ब्लड बैंक से ब्लड लाया जा सकेगा। इसमें सरकारी या निजी ब्लड बैंक की कोई बंदिश नहीं रहेगी। नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल (एनबीटीसी) ने नई गाइडलाइन जारी कर इसकी अनुमति दे दी है। नए साल से व्यवस्था शुरू हो जाएगी। नए नियमों से राजधानी में जेपी अस्पताल, हमीदिया अस्पताल, कस्तूरबा अस्पताल और रेडक्रॉस अस्पताल के बीच ब्लड ट्रांसफर हो सकेगा।

अभी तक बल्क में ब्लड को एक से दूसरी जगह ले जाने का नियम नहीं था। दो राज्यों के बीच तो एक यूनिट ब्लड भी इधर-उधर नहीं हो सकता था। मप्र स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल के अधिकारियों ने बताया कि गाइडलाइन में ब्लड को एक से दूसरे ब्लड बैंक ले जाने के नए नियम तो बन गए हैं लेकिन इसकी शर्तें भी कड़ी कर दी गई हैं।

इन शर्तों के तहत रास्ते में ब्लड खराब न हो, ब्लड तय तापमान और समय पर पहुंचे, किस ब्लड बैंक से कहां के लिए ब्लड भेजा गया है उसका पूरा रिकॉर्ड देना होगा। इसका मकसद मरीज को सही, आसानी से और समय पर ब्लड उपलब्ध कराना है। ज्ञात हो कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में कुछ ही जगह बहुत ज्यादा ब्लड रहता है। जबकि ब्लड की लाइफ सिर्फ 35 दिन होती है, लिहाजा समय गुजरने के बाद इसे फेंकना पड़ जाता है।

प्लाज्मा बेचने के लिए जल्द होगा टेंडर

ब्लड बैंक अब प्लाज्मा (खून का तत्व) को करीब 1600 रुपए में बेच सकेंगे। अभी तक इसके लिए कोई नियम नहीं था। लिहाजा, ब्लड बैंक प्लाज्मा नालियों में फंेक देते थे। इसी प्लाज्मा से मानव प्रोटीन के लिए इंजेक्शन बनाया जाता है। एक इंजेक्‍शन की कीमत 2500 से 5000 रुपए तक है। मप्र स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. सीएम त्रिपाठी ने बताया कि प्लाज्मा बेचने के लिए राज्य स्तर पर टेंडर बुलाए जाएंगे।

जीएमसी में नहीं बढ़ेंगे ब्लड के रेट

गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में ब्लड के दाम नहीं बढ़ाए जाएंगे। अभी एक यूनिट ब्लड लेने पर 800 रुपए लगते हैं। प्राइवेट ब्लड बैंकों की मांग पर एनबीटीसी ने इसे एक हजार रुपए करने गाइडलाइन जारी की है। 1 जनवरी 2016 से नए रेट लागू हो जाएंगे। हालांकि यह ब्लड बैंकों या अस्पतालों के ऊपर है कि वे ब्लड की जांच में इजाफा करते हैं या नहीं।

हमीदिया अस्पताल के ब्लड बैंक ऑफिसर डॉ. यूएम शर्मा ने बताया कि उन्हें अभी तक कोई गाइडलाइन नहीं मिली है, न ही रेट बढ़ाने का कोई प्रस्ताव है। गाइडलाइन बाध्यकारी नहीं होती। उन्होंने बताया कि 2011 तक 550 रुपए लिए जाते थे। बाद में इसमें इजाफा किया गया। ब्लड बैंक में ब्लड की एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और सी, वीडीआरएल व मलेरिया जांच की जाती है। इनकी किट काफी महंगी आती है, इसलिए 800 रुपए फीस रखी गई है। इसके अलावा जिस मरीज को ब्लड चढ़ना है, डोनर के साथ उसके ब्लड को भी क्रॉस मैच किया जाता है।

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