इंदौर: बल्ले की मार झेल चुके नगर निगम अधिकारी भूले जर्जर इमारतें

इंदौर: बल्ले की मार झेल चुके नगर निगम अधिकारी भूले जर्जर इमारतें

- in भोपाल/ म.प्र
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इंदौर,

इंदौर में जिस जर्जर मकान को गिराने को लेकर विवाद खड़ा हुआ उस पर भले ही हाई कोर्ट ने अब फैसला दे दिया हो लेकिन इस विवाद के कारण इंदौर के बचे हुए जर्जर मकानों को गिराने की मुहिम लगभग थम सी गई है. आजतक ने इंदौर के उन मकानों को ढूंढ निकाला जो नगर निगम की सूची के मुताबिक खतरनाक हैं लेकिन उन्हें अब तक गिराया नहीं गया है.

26 जून को इंदौर नगर निगम की टीम गंजी कंपाउंड स्थित एक जर्जर मकान को ढहाने पहुंची थी लेकिन उस दौरान जो विवाद हुआ उसकी वजह से इंदौर तीन से बीजेपी विधायक आकाश विजयवर्गीय को जेल की हवा तक खानी पड़ी. इस विवाद के कारण मामला इंदौर हाई कोर्ट तक पहुंच गया और अब तक जर्जर मकान को गिराया नहीं जा सका. लेकिन यह इकलौता मकान नहीं है जो विवाद के कारण जर्जर स्थिति में होने के बावजूद गिराया नहीं गया हो. इंदौर नगर निगम ने ऐसे कुल 26 मकानों को बारिश से पहले खतरनाक घोषित किया था जिसमें से ज्यादातर मकान ज्यों के त्यों खड़े हैं.

आजतक के हाथ इंदौर नगर निगम द्वारा खतरनाक घोषित हो चुके उन मकानों की सूची है जिनको इस साल मॉनसून से पहले गिराया जाना था. इस लिस्ट में गंजी कंपाउंड के उस मकान का भी जिक्र है जिस पर विवाद खड़ा हुआ. इस लिस्ट में शामिल शुरुआती 10 इमारतें गिराई जा चुकी हैं और 11वीं इमारत को गिराते वक्त यह पूरा विवाद खड़ा हुआ. आजतक की टीम अब उन मकानों तक पहुंच गई है जिन्हें गिराया तो जाना था लेकिन बल्लाकांड के बाद नगर निगम ने फिलहाल उनसे दूरी बनाए रखी है.

मराठी मोहल्ला
हमारी टीम सबसे पहले पहुंची पुराने इंदौर के मराठी मोहल्ले में. यहां मोहल्ले के बीचो-बीच करीब 100 साल पुराना एक मकान मिला जो बेहद जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है और नगर निगम की खतरनाक इमारतों की सूची में शामिल है. यहां रहने वाले किराएदार कुछ समय पहले ही इस मकान को खाली कर चुके हैं. उनकी मानें तो यह इमारत बारिश के दौरान बड़ा खतरा साबित हो सकती है. इस मकान के इर्द-गिर्द कई और मकान भी बने हुए हैं जल्द ही यह मकान नहीं गिराया गया तो भारी बारिश के दौरान जान माल का नुकसान हो सकता है.

चंद्रभागा जूनी
इसके बाद हमारी टीम पहुंची इंदौर के ही चंद्रभागा इलाके में. चंद्रभागा इंदौर के कुछ सबसे पुराने मोहल्लों में शामिल है जहां कई पुरानी इमारतें हैं. इस इलाके में बनी एक पुरानी इमारत कुछ रोज़ पहले ही गिराई गई थी लेकिन इस इलाके में अभी कई और जर्जर इमारतें मौजूद हैं और उन्हीं में से एक इमारत इंदौर नगर निगम की खतरनाक भवनों की सूची में भी शामिल है लेकिन गंजी कंपाउंड में विवाद के बाद निगम की टीम ने इस इमारत को भी हाथ नहीं लगाया है.

जर्जर भवनों की सूची पर खड़े हुए सवाल
इंदौर नगर निगम भले ही विवादों की वजह से कई खतरनाक भवनों को नहीं गिरा पाया हो लेकिन सवाल निगम की ईमानदारी पर भी है.एसा इसलिए क्योंकि इंदौर में अभी भी ऐसी कई इमारतें हैं जो बेहद जर्जर स्थिति में होने के बावजूद निगम के रडार पर नहीं है.यानी निगम उन इमारतों पर आंख मूंदे बैठा है. ऐसी ही एक इमारत इंदौर के काछी मोहल्ले में है जो निगम की सूची में तो नहीं लेकिन मंगलवार को बारिश के दौरान उस इमारत का छज्जा भरभरा कर नीचे खड़ी कार के ऊपर गिर गया, गनीमत यह रही कि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ.

सवाल इसलिए भी क्योंकि काछी मोहल्ले की इमारत गंजी कंपाउंड स्थित विवादित इमारत से महज कुछ सौ मीटर की दूरी पर ही स्थित है लेकिन नगर निगम की नजर इस पर नहीं पड़ी. वहीं खतरनाक भवनों की सूची बनाने में इंदौर नगर निगम की लापरवाही का एक और सबूत देखने को मिला है. मंगलवार रात इंदौर में हुई बारिश के बाद नगर निगम के मुख्यालय के पास ही बनी एक पुरानी इमारत बुधवार सुबह अचानक भरभरा कर गिर पड़ी.आपको बता दें कि यह इमारत भी नगर निगम की जर्जर भवनों की सूची में शामिल नहीं थी और यह इमारत मॉनसून की मार झेल ना सकी और गिर गई.

इंदौर नगर निगम ने इस साल मॉनसून से पहले पूरे इंदौर में 26 ऐसे खतरनाक और जर्जर हो चुके मकानों की पहचान की है जिनको जल्द गिराया जाना है लेकिन कई इमारतें ऐसी भी हैं जो निगम की सूची में अपनी जगह तो नहीं बना पाई लेकिन इंदौर वालों के सिर पर खतरा बनकर खड़ी है. वही बल्लाकांड में हुए विवाद के बाद पुराने मकानों को गिराने की मुहिम बंद होने से खतरा और बढ़ गया है.

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