झारखंड: JDU में BJP के कई नेता, अकेले चुनाव

झारखंड: JDU में BJP के कई नेता, अकेले चुनाव

रांची/पटना

नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू बिहार में बीजेपी के साथ जरूर है लेकिन पड़ोसी राज्य झारखंड उसने अपनी राहें अलग कर ली हैं। शनिवार को नीतीश कुमार के नेतृत्व में कोर कमिटी की बैठक के बाद पार्टी ने ऐलान कर दिया कि वह आगामी झारखंड विधानसभा चुनाव में सभी 81 सीटों पर अपने प्रत्याशी मैदान में उतारेगी। बता दें कि झारखंड में इसी साल नवंबर- दिसंबर में विधानभा चुनाव होना है। इस फैसले के बाद एक बार फिर बीजेपी और जेडीयू में दूरियां बढ़ने की अटकलें तेज हो गई हैं। बता दें कि केंद्र में मोदी कैबिनेट में जेडीयू से कोई भी मंत्री शामिल नहीं है। उधर, नीतीश कुमार ने भी मंत्रिमंडल विस्तार में बीजेपी कोटे से किसी को नहीं रखा। इसके बाद से दोनों पार्टियों में मतभेद की अटकलें हैं।दरअसल, नीतीश कुमार की पार्टी झारखंड में तीसरे विकल्प के रूप में खुद को मजबूत करने में जुटी हुई है। माना जा रहा है कि इसी रणनीति के तहत पार्टी ने सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है।

प्रशांत किशोर भी थे बैठक में मौजूद
नीतीश कुमार के आवास पर शनिवार को आयोजित इस बैठक में पार्टी उपाध्यक्ष और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर भी मौजूद थे। इस दौरान झारखंड प्रभारी और नीतीश सरकार में मंत्री रामसेवक, झारखंड प्रदेश अध्यक्ष सालखन मुर्मू सहित झारखंड से जुड़े कई वरिष्ठ नेताओं को भी इसमें शामिल किया गया।

बीजेपी के मुकाबले मजबूत विकल्प बनने की तैयारी
इस बैठक के बाद हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मुर्मू ने कहा, आज झारखंड में जिस तरह का राजनीतिक परिदृश्य है उसमें झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन बीजेपी गठबंधन को हराने में सक्षम नहीं है। यही वजह है कि यहां पार्टी ने बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन के विकल्प के रूप में उभरने का फैसला किया है। बैठक में नीतीश कुमार जी ने सभी 81 सीटों पर बीजेपी और उसके गठबंधन ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (एजेएसयू)के खिलाफ मजबूत और जिताऊ प्रत्याशी उतारने के लिए कहा है ताकि हम इन्हें कड़ी टक्कर दे सकें।

बीजेपी के कई नेता जेडीयू में हुए शामिल
उधर, झारखंड में बीजेपी, जेएमएम, एजेएसयू और जेपीएम (पी) के कई नेताओं ने शनिवार को पटना में नीतीश कुमार की मौजूदगी में जेडीयू का दामन थाम लिया। जेडीयू का मानना है कि विधानसभा चुनावों से ऐन पहले इन नेताओं के शामिल होने से पार्टी और मजबूत होगी।

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