काबुल: US सैनिकों की वापसी, मुश्किल में भारत!

काबुल: US सैनिकों की वापसी, मुश्किल में भारत!

- in अंतरराष्ट्रीय
0

वॉशिंगटन

राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने के आदेश दे रहे हैं और इस क्रम में 50 प्रतिशत सैनिकों की अगले दो महीने में स्वदेश वापसी होगी। यह कदम अफगान सरकार को मझधार में छोड़ देने जैसा होगा। चूंकि इससे तालिबान और अन्य पाकिस्तानी आतंकियों के लिए यहां आने का रास्ता खुलने की संभावना है जिससे अफगानिस्तान में भारत की मौजूदगी और निवेश खतरे में पड़ जाएगा।

ट्रंप के अफगानिस्तान से सैनिकों को वापस बुलाने को कुछ अमेरिकी हार के रूप में देख रहे हैं। यह फैसला ऐसे समय में किया गया जब ट्रंप ने मंगलवार को ट्विटर पर सीरिया से अपने सैनिकों को बुलाने की घोषणा की थी। ट्रंप ने दोनों देशों से सैनिकों को बुलाने की इच्छा अक्सर अपने राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान जाहिर की थी, जिसकी वजह से गुरुवार को रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस को इस्तीफा देना पड़ा है।

ट्रंप ने ट्विट किया कि मैटिस रियाटर हो रहे हैं, लेकिन मैटिस ने अपना इस्तीफा भेज दिया। कैबिनेट में एकमात्र वयस्क शख्सियत माने जाने वाले मैटिस अस्थिर राष्ट्रपति को सलाह दे सकते हैं। इस इस्तीफे ने दोनों के बीच के मतभेद को जाहिर कर दिया है। ये मतभेद सहयोगी देशों के साथ व्यवहार से लेकर अमेरिका के असली खतरे सहित कई मुद्दों पर जाहिर हुए हैं।

मैटिस ने लिखा, ‘मैं सहयोगियों के साथ इज्जत के साथ पेश आने और दुष्ट ताकतों तथा रणनीतिक प्रतियोगियों पर स्पष्ट नजर रखने का इच्छुक हूं। हमें अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास करने चाहिए जो कि हमारी सुरक्षा, उन्नति, मूल्यों के लिए सबसे अधिक हितकर हैं और हमने अपने सहयोगियों का साथ देकर इस प्रयास को मजबूत किया है।’

अपने भारतीय समकक्ष निर्मला सीतारमण से इस साल चार बार मुलाकात कर चुके मैटिस ने कहा, ‘क्योंकि आपका यह अधिकार है कि आपके पास ऐसे रक्षा मंत्री हों जो इस मुद्दे और अन्य विषयों पर आपकी राय से बेहतर सहमत हों, मैं मानता हूं कि मेरे लिए यह सही है कि मैं अपने पद से इस्तीफा दे दूं।’

अमेरिकी राष्ट्रपति चिंता मुक्त रहे हैं तब जब विदेशी नीति और रणनीतिक व्यवस्था में इस घोषणा के बाद हलचल मच गई क्योंकि उन्होंने सरकारी कामबंदी के खतरे के बीच कांग्रेस में सीमा की चाहरदीवारियों के लिए फंड जुटाने की लड़ाई लड़ी थी। इस घटना से लोगों ने यह मजाक करना शुरू कर दिया था कि दुनिया की सबसे बड़ी सेना सिर्फ रिफ्यूजी और शरण मांग रहे लोगों की समस्या से ही बेहतर निपट सकती है।

ट्रंप ने ट्विटर पर लिखा, ‘सीरिया से बाहर आना आश्चर्य की बात नहीं है। मैं इसके लिए सालों से कैम्पेन कर रहा हूं। छह महीने पहले जब मैं सार्वजनिक रूप से यह कर ना चाहता था, मैं लंबे समय तक रुकने के पक्ष में था। रूस, ईरान, सीरिया और अन्य इस्लामिक स्टेट के स्थानीय दुष्मन हैं। हम उनका काम कर रहे थे। अब समय घर आने और पुनर्निर्माण का है।’

ट्रंप ने अफगानिस्तान से वापसी का जिक्र नहीं किया, लेकिन पूछा, ‘क्या अमेरिका को मध्य-पूर्व का पुलिस बनना चाहिए, कुछ हासिल न होना, बल्कि अनमोल जिंदिगयां और अरबों डॉलर दूसरों की रक्षा में खर्च करना, जो कि अधिकांश मामलों में हमारे काम की कभी सराहना नहीं करते? क्या हमें हमेशा वहां रहना चाहिए?’

अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी 17 सालों तक रही और ट्रंप ने वहां अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी की उपयोगिता को शक की निगाह से देखा है। इस बात से अनजान रहते हुए कि 90 के दशक में पैदा हुए शून्य को लेकर, जिसने अलकायदा को जन्म दिया और 9/11 जैसी भयानक घटना हुई।

Leave a Reply