जानें, क्यों दुनियाभर में फेल हो जाती है शराबबंदी

जानें, क्यों दुनियाभर में फेल हो जाती है शराबबंदी

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नई दिल्ली

मिजोरम विधानसभा चुनाव में मिजो नेशनल फ्रंट की जीत के साथ राज्य की बागडोर संभालने जा रहे जोरामथंगा अपनी पार्टी के चुनावी वादे के तहत राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू करने जा रहे हैं। मिजोरम में ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। इससे पहले भी सूबे में शराबबंदी हो चुकी है, लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया गया, क्योंकि इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। केवल मिजोरम ही नहीं, बल्कि कई अन्य राज्यों में भी शराबबंदी लागू हुई, लेकिन यह ज्यादा दिनों तक नहीं चल सका। आखिर क्या कारण है कि शराबबंदी लागू तो होती है, लेकिन टिक नहीं पाती।

किसी भी राज्य में शराबबंदी के बहुत ज्यादा दिनों तक नहीं चलने के पीछे दो कारण हैं। पहला कारण ‘वित्तीय’ है, क्योंकि शराब की बिक्री पर टैक्स से होने वाली आमदनी की हिस्सेदारी राज्य की कुल आय की एक चौथाई तक होती है। अगर आय का यह साधन अचानक बंद हो जाता है, तो राज्यों को कुछ जरूरी खर्चों में कटौती करनी पड़ती है। ऐसे में निवेशक राज्य में निवेश करने से कतराते हैं। यहां तक कि पर्यटक भी उस राज्य से मुंह मोड़ लेते हैं। अंततः राज्यों को शराबबंदी का कानून वापस लेना पड़ता है और शराब की बिक्री फिर शुरू हो जाती है। इतिहास गवाह है कि कहीं भी शराबबंदी बहुत ज्यादा दिनों तक नहीं टिकी है।

अभी इन राज्यों में है शराबबंदी
1. गुजरातः किसी अन्य संगठित गतिविधियों की तरह गुजरात में शराब की अवैध सप्लाई के कई चैनल काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री विजय रूपाणी शराबबंदी से हुए राजस्व के नुकसान के लिए मुआवजे की मांग कर चुके हैं।
2. बिहारः इस राज्य में 2016 में शराबबंदी हुई। लेकिन इसके पड़ोसी राज्यों पश्चिम बंगाल, झारखंड और उत्तर प्रदेश में इस दौरान उत्पाद कर में अचानक भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो बिहार में शराब की तस्करी का संकेत देता है।
3. नागालैंड में भी शराबबंदी है।
4. मणिपुर में भी शराबबंदी है, लेकिन पांच जिलों में इसे हटा लिया गया है।
5. लक्षद्वीप में भी शराबबंदी है।
6. मिजोरम में शराबबंदी प्रस्तावित है।

शराबबंदी फेल होने का पहला कारण
शराबबंदी से शराब के अवैध कारोबार को बढ़ावा मिलता है। वास्तव में शराब के तस्करों के लिए शराबबंदी फायदेमंद होता है और उनसे घूस लेने वाले अधिकारियों को भी यह फायदा पहुंचाता है।

शराबबंदी फेल होने का दूसरा कारण
सरकार शराबबंदी के लिए क्यों जोर देती है? दरअसल, राजनीतिक दलों का मकसद महिलाओं का समर्थन पाना, अपराध में कमी लाना, सामाजिक समस्याओं को सुलझाना, सड़क दुर्घटनाओं को रोकना और लोगों के स्वास्थ्य में सुधार लाना होता है। लेकिन लोग फिर भी शराब से मुंह नहीं मोड़ते और अवैध तौर पर मिलने वाले शराब की तरफ अपना रुख कर लेते हैं।

शराबबंदी फेल होने का तीसरा कारण
सरकार की कुल आय में शराब की बिक्री पर लगने वाले टैक्स से होने वाली आय की हिस्सेदारी एक चौथाई होती है। तमिलनाडु को वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान शराब पर टैक्स से 29,672 करोड़ रुपये, हरियाणा को 19,703 करोड़ रुपये, महाराष्ट्र को 18,000 करोड़ रुपये, कर्नाटक को 15,332 करोड़ रुपये, उत्तर प्रदेश को 14,083 करोड़ रुपये, आंध्र प्रदेश को 12,739 करोड़ रुपये, तेलंगाना को 12,144 करोड़ रुपये, मध्य प्रदेश को 7,926 करोड़ रुपये, राजस्थान को 5,585 करोड़ रुपये और पंजाब को 5,000 करोड़ रुपये की आमदनी हुई थी।

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