एयरस्पेस बंदी से घाटे में पाक, यूं होती है कमाई

एयरस्पेस बंदी से घाटे में पाक, यूं होती है कमाई

नई दिल्ली

पाकिस्तानी एयरस्पेस बंद होने से भारतीय एयरलाइंस को बड़ी चोट पहुंची है। भारत से दूसरे देशों को जाने वाले विमानों को पाकिस्तानी एयरस्पेस को छोड़कर वैकल्पिक रूटों का इस्तेमान करना पड़ता है, इससे उड़ान के समय और लागत में बढ़ोतरी होती है। वहीं दूसरी तरफ, इसके प्रभाव से पाकिस्तान पर भी भारी असर पड़ा है। फरवरी से अब तक करीब 400 फ्लाइट रोजाना पाकिस्तान के एयर स्पेस का इस्तेमाल नहीं कर रही हैं, जिससे उसे 100 मिलियन डॉलर (करीब 688 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ है।

पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी हमले के बाद भारत ने बालाकोट में एयर स्ट्राइक कर आतंक ठिकानों को नष्ट किया था। उसके बाद से पाकिस्तान ने अपने 11 में से 9 हवाई रास्तों को बंद किया हुआ है। फिलहाल पाकिस्तान के सिर्फ दो हवाई रास्ते चालू हैं, जो दक्षिणी पाकिस्तान से होकर गुजरते हैं।जबकि भारतीय वायु सेना ने 31 मई को ऐलान किया था कि बालाकोट स्ट्राइक के बाद भारतीय एयरस्पेस पर लगाए गए सभी अस्थाई प्रतिबंध हटा दिए गए हैं।

तो देश हवाई रास्ते से कैसे कमाते हैं?
एयरटोल: एयरलाइंस उस देश के सिविल एविएशन प्रशासन को एक शुल्क देते हैं, जिसके एयरस्पेस का इस्तेमाल वे करती हैं। यह शुल्क एयरक्राफ्ट के टाइप, तय की जाने वाली दूरी, एयरक्राफ्ट का लगभग वजन पर निर्भर करता है। पाकिस्तान के मामले में, बोइंग 737 को एयरस्पेस का इस्तेमाल करने की एवज में 580 डॉलर का शुल्क देना होता है, वहीं एयरबस 380 या बोइंग 747 के लिए यह शुल्क बढ़ जाता है।

क्या सभी एयरस्पेस इतने महंगे हैं? नहीं। उदाहरण के लिए कनाडा एयरप्लेन के वजन और तय की गई दूरी के हिसाब से शुल्क लेता है, जबकि उसके दक्षिणी पड़ोसी देश (जैसे अमेरिका) सिर्फ तय की गई दूरी का चार्ज लेते हैं। हालांकि इतना उदार होना इसलिए बर्दाश्त कर सकता है क्योंकि उसका एयरस्पेस सिर्फ उसके जमीनी इलाके तक सीमित नहीं है, बल्कि फिलीपींस तक फैला हुआ है। इसका मतलब है कि जापान से न्यू जीलैंड से जाने वाली फ्लाइट जो महाद्वीपीय संयुक्त राज्य अमेरिका से होकर गुजरती है। अमेरिका के इसके लिए 26.51 डॉलर प्रति नॉटिकल माइल्स (लगभग 185.2 किलोमीटर) का चार्ज लेता है।

भारत कितना महंगा है? डीजीसीए ने भारत में ओवरफ्लाइट और लैंडिंग चार्ज तय किया है। इसमें स्थानीय उड़ानों को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से ज्यादा भगुतान करना होता है। शुल्क के लिए तय किए गए रास्ते की नॉटिकल माइल्स के हिसाब से गणना की जाती है और फ्लाइट का वजन देखा जाता है। यदि फ्लाइट भारत की जमीन पर लैंड करती है तो उसके लिए 5,330 रुपये अतिरिक्त देने होते हैं। यदि फ्लाइट भारतीय जमीन का इस्तेमाल किए बगैर यहां के एयरस्पेस से गुजरती है तो एयरस्पेस फीस, तय की गई दूरी और वजन के चार्ज के साथ 5,080 रुपये अतिरिक्त देने होते हैं।

पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होने की वजह से भारतीय विमानन एयर इंडिया को 2 जुलाई तक 491 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। यह जानकारी सिविल एविएशन मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा में दी। प्राइवेट एयरलाइंस में स्पाइसजेट को 30.73 करोड़ रुपये, इंडिगो को 25.1 करोड़ रुपये और गोएयर के 2.1 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

चार्ज में अंतर क्यों? 1944 में अमेरिका ने शिकागो में इंटरनैशनल सिविल एविएशन कन्वेंशन का आयोजन किया। अमेरिका चाहता था कि देशों के बीच कमर्शल विमानों के लिए हवाई प्रतिबंध खत्म कर दिया जाए। यह बातचीत विफल हो गई और देशों ने अपने-अपने हिसाब से अपने एयरस्पेस के लिए शुल्क लेना शुरू कर दिया।

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