इस्तीफा दिया लेकिन न पार्टी त्यागी, न तेवरः राहुल की चिट्ठी के 5 अहम पहलू

इस्तीफा दिया लेकिन न पार्टी त्यागी, न तेवरः राहुल की चिट्ठी के 5 अहम पहलू

- in राजनीति
0

नई दिल्ली,

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. पार्टी नेताओं ने उन्हें मनाने के लिए पुरजोर प्रयास किए, भूख हड़ताल तक की लेकिन वह नहीं माने. बुधवार को राहुल ने ट्विटर पर पहले चार पन्ने की चिट्ठी पोस्ट की, फिर अपना प्रोफाइल अपडेट कर कांग्रेस अध्यक्ष की जगह कांग्रेस सदस्य कर दिया. राहुल ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया लेकिन न पार्टी त्यागी है और न ही तेवर.

राहुल ने आश्वस्त किया है कि वह पार्टी के लिए हमेशा उपलब्ध रहेंगे. हालांकि राहुल ने यह इशारा नहीं किया है कि आगे पार्टी में उनकी भूमिका क्या होगी. राहुल की चिट्ठी का संदेश स्पष्ट है, उन्होंने भी यह मान लिया है कि वर्तमान कांग्रेस भारतीय जनता पार्टी को मात नहीं दे पाएगी. इसके लिए नई कांग्रेस जरूरी है. कमजोर होती जा रही कांग्रेस पर उठते सवालों के बीच राहुल ने अंतिम सांस तक कांग्रेस के लिए लड़ने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है. राजनीतिक गलियारों में इसे राहुल गांधी द्वारा इस बात की स्वीकारोक्ति के तौर पर देखा जा रहा है कि कांग्रेस अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है.

अन्य नेताओं पर बढ़ा इस्तीफा देने का दबाव
राहुल गांधी ने सामूहिक जिम्मेदारी की बात की है. राहुल ने ताकत के लिए अपनी भूख को मारने का संदेश भी दिया है. इसके भी सियासी निहितार्थ निकाले जाने लगे हैं. राजनीति के जानकार इसे कांग्रेस शासित राज्यों में सरकार की तस्वीर बदलने का इशारा बता रहे हैं. राहुल के इस्तीफे से पार्टी संगठन में बदलाव होगा ही, कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों पर भी इस्तीफा देने का दबाव बढ़ गया है. राज्यों में खराब प्रदर्शन की गाज मुख्यमंत्रियों पर गिरनी तय मानी जा रही है.

अंतर्कलह की ओर इशारा
राहुल गांधी ने भाजपा से लड़ते रहने की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए अकेले पड़ जाने का जिक्र किया. कांग्रेस में अंतर्कलह की बात सामने आती रही है. राहुल के अकेले पड़ने की बात को अंतर्कलह की ओर इशारा माना जा रहा है. चुनाव प्रक्रिया के दौरान भी राहुल ने बड़े नेताओं से परिजनों के लिए टिकट न मांगने को कहा था. लेकिन राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के पुत्र कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े. राहुल की भावना यह बताती है कि पार्टी में सबकुछ ठीक नहीं.

भाजपा के साथ आरएसएस से भी कांग्रेस को लड़ना होगा
कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बावजूद राहुल के तेवर नहीं बदले हैं. उनकी चिट्ठी का दूसरा पन्ना पूरी तरह से भाजपा, भाजपा के आइडिया ऑफ न्यू इंडिया, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और चुनाव के नाम है. राहुल ने फिर से द्वेष-घृणा की राजनीति का जिक्र कर भाजपा पर हमला किया है. राहुल ने पार्टी के सांगठनिक ढांचे को लिखा है कि हमने साफ-सुथरी राजनीति की. वह द्वेष और घृणा की राजनीति करते हैं, मैं प्यार की राजनीति करता हूं. राहुल ने सामाजिक सौहार्द, हिंसा की ओर इशारा करते हुए कहा है कि देश में कई सुरों का समावेश रहा है. यह हमारी पहचान रही है.

चुनाव प्रक्रिया पर उठाए सवाल, मीडिया और न्यायपालिका को भी नहीं बख्शा
राहुल ने भाजपा और संघ के साथ ही मीडिया, न्यायपालिका और चुनाव आयोग पर निशाना साधा है. राहुल ने देश की संस्थाओं के संघ के कब्जे में होने की बात कर भाजपा सरकार को घेरा, वहीं लोकतंत्र कमजोर होने की बात कर यह संदेश भी दिया कि संस्थाओं की स्वायत्तता बहाल करने के लिए कांग्रेस जरूरी है. राहुल ने भविष्य के भारत को दर्द और हिंसा से भरा बताया मोदी के सबका विश्वास के नारे की हवा भी निकाली. सबसे ज्यादा गरीब और दबे-कुचले तबको के प्रभावित होने की बात कर भय को भी हवा दिया. राहुल ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने के साथ ही न्यायपालिका और मीडिया पर भी निशाना साधा .

पीएम मोदी पर बने रहेंगे हमलावर
राहुल गांधी ने कांग्रेस का अध्यक्ष पद छोड़ते हुए भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा. राहुल ने चुनाव जीतने से भ्रष्टाचार के नहीं छिपने की बात की. इसे इस बात का संकेत माना जा रहा है कि वह भाजपा के सबसे बड़े नेता को टार्गेट करने की अपनी रणनीति पर ही बने रहने वाले हैं.राहुल की चिट्ठी में उनके तेवर इस बात का संकेत हैं कि उन्होंने पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा जरूर दे दिया है, लेकिन भाजपा और संघ के सामने हथियार नहीं डाले हैं. राहुल ने नई कांग्रेस, नए तेवर के साथ आगे और लड़ाई का संदेश भी दे दिया है.

Leave a Reply