तंदूर कांड: सुशील शर्मा को तुरंत रिहा करने का आदेश

तंदूर कांड: सुशील शर्मा को तुरंत रिहा करने का आदेश

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नई दिल्ली

दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को 1995 के तंदूर कांड मामले के दोषी कांग्रेस के पूर्व नेता सुशील कुमार शर्मा को तत्काल प्रभाव से रिहा करने के आदेश दिए हैं। वह अपनी पत्नी नैना साहनी की हत्या के मामले में जेल में बंद हैं। इससे पहले मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया था और शर्मा की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर उसका पक्ष मांगा था। शर्मा की तरफ से दायर याचिका में इस आधार पर जेल से रिहा करने की मांग की गई है कि वह 23 साल से जेल में बंद है जिसमें क्षमा की अवधि भी शामिल है और उसे लगातार बंदी बनाकर रखा जाना अवैध है।

कोर्ट ने कहा था कि किसी व्यक्ति की जिंदगी एवं आजादी पर विचार करना सर्वोपरि है और दिल्ली सरकार से पूछा गया था कि किसी व्यक्ति को अनिश्चितकाल तक कैसे हिरासत में रखा जा सकता है। शर्मा की याचिका के मुताबिक समय से पूर्व रिहाई के दिशा-निर्देश कहते हैं कि एक अपराध के लिए मिली उम्रकैद की सजा के दोषियों को 20 साल की सजा के बाद और घृणित अपराधों में 25 साल की सजा के बाद रिहा कर दिया जाना चाहिए।

अब 56 साल के हो चुके शर्मा ने विवाहेत्तर संबंध के शक में अपनी पत्नी की 1995 में गोली मारकर हत्या कर दी थी। उसके बाद उसने पत्नी के शव को टुकड़ों में काटकर रेस्तरां के तंदूर में जलाने का प्रयास किया था। तंदूर हत्याकांड के तौर पर जाना जाने वाला यह मामला भारत के ऐसे आपराधिक मामलों में से एक है जिसमें आरोपी के दोष को साबित करने के लिए डीएनए साक्ष्य और दूसरी बार पोस्टमार्टम कराने का सहारा लिया गया था। अपनी याचिका में शर्मा ने तर्क दिया कि जेल में और परोल पर बाहर रहने के दौरान उसका आचरण अच्छा रहा और उसने कभी भी अपनी छूट का अनुचित इस्तेमाल नहीं किया।

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