वंदे भारत पर पथराव रोकने के लिए लगेंगे अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे

वंदे भारत पर पथराव रोकने के लिए लगेंगे अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे

प्रयागराज

रेलवे ने सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत (टी-18) में अतिरिक्त हाईस्पीड और हाई रेज़ॉलूशन सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्णय लिया है। ऐसा लगातार हो रही पथराव की घटनाओं पर नियंत्रण करने के लिए किया जा रहा है। इस ट्रेन में पहले से ही दो सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। लेकिन दोनों सामने लगाए गए हैं, जबकि पथराव ट्रेन की साइडों पर होता है। पथराव की घटनाओं को देखते हुए आरपीएफ और जीआरपी की एक संयुक्त टीम भी गठित की गई है जो विशेषकर इस ट्रेन की सुरक्षा पर नजर रख रही है।

बेहतर तस्‍वीर आएगी
उत्तर रेलवे के दिल्ली मंडल ने 130 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाली इस ट्रेन में ऐसे अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्णय लिया है जो इसकी तेज रफ्तार के बावजूद साफ और बेहतर क्‍वॉलिटी की तस्वीरें ली जा सकेंगी।

ये कैमरे साइड में लगेंगे
ट्रेन में पहले से ही दो कैमरे लगे हैं जिनकी मदद से ही फतेहपुर में हुए पथराव के आरोपियों को रेलवे पुलिस ने गिरफ्तार किया था। अब रेलवे ने हाल की घटनाओं को देखते हुए चार-चार कैमरों का इस ट्रेन के साइड में लगाने का निर्णय लिया है। जिससे पूरी ट्रेन कवर हो सके। उत्तर मध्य रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी अमित मालवीय ने बताया कि, रेलवे बोर्ड के निर्देशों के अनुसार इस महीने के अंत तक कैमरे लगा दिए जाएंगे।

जागरूकता अभियान का दिखा असर
एसपी जीआरपी इलाहाबाद हिमांशु कुमार ने बताया कि, वाराणसी से कानपुर के बीच ट्रेन पर पथराव करने वालों की पहचान और उन्हें पकड़ने के लिए जीआरपी और आरपीएफ की एक विशेष टीम बनाई गई है। थाना और चौकी स्तर पर बनी इस टीम के सदस्य सादे कपड़ों में अपने-अपने क्षेत्र में गश्त कर ऐसे लोगों पर नजर रख रहे हैं। इस सतर्कता और गांवों में लोगों के बीच जाकर जागरूकता अभियान चलाने के बाद ऐसी घटनाओं पर लगाम लगी है। अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगने से और मदद मिलेगी।

गौरतलब है कि, दिल्ली और वाराणसी के बीच चलने वाली इस सेमी हाईस्पीड ट्रेन को 15 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने झंडी दिखाकर रवाना किया था। लेकिन इसके ट्रायल रन से लेकर अब तक चार बार पथराव की घटनाएं हो चुकी हैं। 1 मार्च को कौशाम्बी के भरवारी, 12 मार्च को फतेहपुर और 17 मार्च को कानपुर के निकट प्रेमपुर में पथराव की घटनाएं हो चुकी हैं। जिससे ट्रेन की 12 खिड़कियों को बदलना पड़ा था।

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