BRI पर आगाह कर अमेरिका ने बताई चीन की असली मंशा

BRI पर आगाह कर अमेरिका ने बताई चीन की असली मंशा

वॉशिंगटन

छोटे देशों को कर्ज में फंसाने की चीन की पॉलिसी धीरे-धीरे बेनकाब होती जा रही है। अब अमेरिका ने कहा है कि चीन अपने राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों को हासिल करने के लिए बेल्ट ऐंड रोड इनिशटिव (BRI) के माध्यम से सरकारी शक्ति का इस्तेमाल कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि ट्रंप प्रशासन लुटेरी चीनी अर्थव्यवस्था के बारे में दुनियाभर के देशों को सूचित करने के वैश्विक प्रयासों की अगुआई कर रहा है। आपको बता दें कि चीन की इस परियोजना पर भारत को भी आपत्ति है और वह लगातार दूसरी बार BRI फोरम का बहिष्कार कर चुका है।

‘छोटे देशों की संप्रभुता पर खतरा’
ट्रंप प्रशासन चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की अरबों डॉलर की बीआरआई परियोजना की आलोचना करता रहा है। अमेरिकी सरकार का साफ मानना है कि चीन की ‘लुटेरी’ अर्थव्यवस्था छोटे देशों को बड़े कर्ज में फंसा रही है और इससे उनकी संप्रभुता पर खतरा पैदा हो रहा है।

पोम्पियो ने फिनलैंड में अपने साथ यात्रा कर रहे पत्रकारों से कहा, ‘बेल्ट ऐंड रोड परियोजना में चीन के प्रयास राष्ट्रीय सुरक्षा के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए सरकारी ताकत का इस्तेमाल करने से जुड़े हैं।’ उन्होंने कहा कि अमेरिका कहता रहा है कि चीन की सफलता और विफलता में उसका बड़ा आर्थिक हित है। उन्होंने आगे कहा कि बीआरआई में पारदर्शिता जरूरी है।

अमेरिका का मत
उन्होंने कहा, ‘यह एक स्वतंत्र और खुले आधार पर होना चाहिए। यह इस आइडिया के साथ नहीं हो सकता कि आप एक देश को लोन दे रहे हैं और फिर फसिलटी को कब्जे में ले लें जिससे आप अपने से कोई पोर्ट बना सकें या जमीन ले लें और रियल एस्टेट का काम करें। यह उचित नहीं है। हमने इसे हतोत्साहित किया है। हमने इन मसलों पर दुनियाभर के देशों को शिक्षित किया है।’

चीन का स्वागत भी करेगा US पर…
US मंत्री ने यह भी कहा कि जहां BRI के तहत सच में ब्रिज का निर्माण हो रहा है और यह एक वाणिज्यिक लेनदेन है तो अमेरिका उसमें चीन की भागीदारी का स्वागत करता है। पोम्पियो ने आगे कहा, ‘लेकिन जहां हम देखते हैं कि चीन ऐसे काम कर रहा है जो वास्तव में कमर्शल नहीं हैं बल्कि उसे राष्ट्रीय सुरक्षा के उद्देश्यों के लिए पहुंच हासिल करने या किसी अन्य बढ़त के लिए डिजाइन किया गया है तो हमें नहीं लगता कि वे देश सच में कुछ पा रहे हैं।’

शी का महत्वाकांक्षी प्रॉजेक्ट
गौरतलब है कि राष्ट्रपति शी ने 2013 में सत्ता में आने के बाद BRI को लॉन्च किया था। इसका मकसद दक्षिणपूर्व एशिया, मध्य एशिया, गल्फ क्षेत्र, अफ्रीका और यूरोप के साथ जमीन और समुद्र मार्गों से चीन को जोड़ना था। अपने वैश्विक प्रभाव को बढ़ाने के लिए चीन एशिया, अफ्रीका से लेकर यूरोप के देशों में इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्टों में भारी-भरकम धनराशि खर्च कर रहा है।

कब बढ़ी चिंता?
BRI फाइनैंसिंग पर चिंता उस वक्त बढ़ गई जब चीन ने श्री लंका के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हंबनटोटा पोर्ट को 2017 में 99 साल की लीज पर ले लिया क्योंकि भारत का यह पड़ोसी देश कर्ज में डूब गया था। इसके बाद दुनिया के कई देश चीन की इस चाल में फंसते चले गए। पाकिस्तान भी चीन के इस प्रॉजेक्ट के तहत CPEC पर काम कर रहा है जो पाक अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरता है और भारत ने इस पर गहरी आपत्ति जताई है।

इससे पहले फिनलैंड में आर्कटिक काउंसिल के सत्र में भी पोम्पियो ने BRI को लेकर चीन की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इससे देशों की संप्रभुता को खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने कहा, ‘चीन को आर्कटिक काउंसिल में ऑब्जर्वर स्टेटस मिला हुआ है लेकिन यह उसके आर्कटिक स्टेट्स के संप्रभु अधिकारों के सम्मान पर निर्भर है। ऐसे में अमेरिका चाहता है कि चीन उन शर्तों को स्वीकार करे, लेकिन चीन के शब्द और कार्य उसकी मंशा को लेकर संदेह पैदा करते हैं।’ अमेरिका ने श्री लंका और मलयेशिया का हवाला देते हुए आर्कटिक देशों को आगाह किया कि वे चीन के असली इरादों से सतर्क रहें।

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