आखिर खर्च कम क्यों करने लगे हैं भारतीय?

आखिर खर्च कम क्यों करने लगे हैं भारतीय?

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पिछले कुछ समय से भारतीयों द्वारा हवाई यात्रा, दुपहिया वाहन, कार और एफएमसीजी प्रॉडक्ट्स आदि पर खर्च करने की दर में कमी आई है। भारतीयों ने बाइक्स और वाहनों पर आने वाले खर्चों में भी कटौती की है। इसके साथ ही आमतौर पर हवाई यात्रा पर होने पर खर्चे में भी कमी देखने को मिली है। यहां तक की शैंपू और साबुन के बजट में भी अब हम भारतीय कटौती करने लगे हैं। कुल मिलाकर भारतीयों के उपभोग करने या पैसा खर्च करने के तरीकों में काफी बिखराव देखा जाने लगा है।

पिछले दस महीनों में पैसेंजर कार खरीद में काफी कमी देखने को मिली। ग्रामीण इलाकों में उपभोक्ताओं की पसंदीदा एफएमसीजी वस्तुओं की खपत में भी 6-7 तिमाही के निचले स्तर पर है। जून 2013 के बाद से हवाई यात्रियों की संख्या में सबसे कम बढ़त दर्ज करते हुए पिछले वर्ष से अबतक हवाई यात्रियों की संख्या में केवल 0.1 प्रतिशत बढ़त दर्ज की गई है।

अर्थव्यवस्था पर असर
आने वाली सरकार को उपभोग को बल देने की शायद आवश्यकता हो सकती है क्योंकि निजी निवेश और आयात के आभाव में उपभोक्ताओं द्वारा खपत अर्थव्यवस्था को बल देने वाले एक कारक के तौर पर बनी हुई है। भारतीयों द्वारा खर्चे में कटौती करने के परिणाम अर्थव्यवस्था पर दिखने लगे हैं। इसका असर आपके वित्तीय स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है अगर आप उन लोगों में से हैं जिन्हें अप्रेजल मिलता है।

आखिर क्या है कारण?
पिछले 2 वर्षों से कृषि आय वृद्धि सुस्त रही है, जीएसटी के कारण वस्तुओं के मूल्य में भी कमी आई है। इसकी तीसरी वजह ये है कि पिछले साल सितंबर में हुए इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग और फाइनैंशल सर्विसेज (आईएलएफएस) के डिफॉल्ट के कारण नकदी की काफी कमी पैदा हुई है जिसकी वजह से लोगों के खर्चों में कमी आई है। कोटक इंस्टीट्यूटशनल इक्वीटीज के संजीव प्रसाद के अनुसार, ‘मैक्रो (घरेलू बचत डेटा) और माइक्रो (सेक्टर और कंपनी वॉल्यूम डेटा) यह बताता हैं कि घरों में खर्चे की कटौती की वजह अपर्याप्त वेतन वृद्धि भी हो सकती है।’

भारतीयों द्वारा खर्चे में कमी लाने का सबसे बुरा प्रभाव दुपहिया वाहन और खासतौर पर स्कूटर के क्षेत्र में आया है। इस सेक्टर में पहली बार वृद्धि दर निगेटिव जा पहुंची है। स्कूटर का आमतौर पर इस्तेमाल शहरी इलाकों में किया जाता है, जहां इसकी खरीद में कमी देखने को मिली है।

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