जेपी नड्डा के होर्डिंग लगाने पर बीजेपी को साढे़ 13 लाख रुपये का नोटिस

जेपी नड्डा के होर्डिंग लगाने पर बीजेपी को साढे़ 13 लाख रुपये का नोटिस

- in भोपाल
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इंदौर

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा के स्वागत में होर्डिंग और बैनर लगाना पार्टी को महंगा पड़ गया है। नगर निगम ने पार्टी के शहर अध्यक्ष को 13 लाख 46 हजार रुपये की वसूली का नोटिस भेज दिया है। बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा रविवार को इंदौर में थे। वह यहां नागरिकता संशोधन कानून पर समाज के विभिन्न वर्गों से संवाद के लिए आए थे। उनके स्वागत में बीजेपी ने बड़ी संख्या में पोस्टर और बैनर लगाए। इस पर नगर निगम ने भाजपा के शहर अध्यक्ष को नोटिस जारी किया।

बता दें कि राज्य की सड़कों पर नेताओं के समर्थकों के स्वागत में बैनर पोस्टर लगाने पर रोक है। इसके लिए राज्य सरकार ने एक नीति बनाकर नगर निगम की अनुमति को अनिवार्य कर दिया गया है। राज्य के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अनावश्यक बैनर पोस्टर लगने पर शहरों की सुंदरता प्रभावित होने की बात कहते हुए नगर प्रशासन को निर्देश दिए थे कि जो भी पोस्टर-बैनर लगाए जाते है, उन्हें हटाया जाएं, भले ही उसमें उनकी (कमलनाथ) तस्वीर ही क्यों न हो। नगर निगम की ओर से रविवार देर रात बीजेपी के शहर अध्यक्ष को साढ़े 13 लाख रुपये का वसूली नोटिस जारी किया गया है।

नोटिस में कहा गया है, ‘शहर के विभिन्न स्थानों पर 22 दिसंबर को बगैर अनुमति के आपके द्वारा (बीजेपी) बैनर-पोस्टर लगाए गए, यह शासन की नीति के खिलाफ है। इस पर 10 लाख 35 हजार रुपये का दंड अधिरोपित किया जाता है। इसमें 1,86,300 रुपये जीएसटी और बैनर-पोस्टर को हटाने में निगम को कुल 1,25,000 रुपये खर्च हुए। इस तरह कुल राशि 13,46,300 रुपये निगम के कोषालय में जमा कराएं।’

नोटिस में कहा गया है कि शहर में लगाए गए होर्डिंग बैनर को हटाने में निगम के 130 कर्मचारियों, नौ ट्रकों और 10 जीपों को लगाना पड़ा। इस अमले और वाहनों पर 1,25,000 रुपये का खर्च आया है। निगम के नोटिस के संदर्भ में बीजेपी के नगर अध्यक्ष गोपी कृष्ण नेमा ने कहा, ‘अभी उनको नोटिस नहीं मिला है, जब नोटिस मिलेगा तब कोई निर्णय लिया जाएगा।’ बता दें कि इंदौर में ही स्वास्थ्य मंत्री तुलसीराम सिलावट के जन्मदिन के मौके पर उनके समर्थकों ने पोस्टर बैनर लगाए थे, जिसे हटाने की कार्रवाई नगर निगम के अमले ने की थी। इस कार्रवाई के दौरान निगम कर्मचारियों और सिलावट समर्थकों के बीच मारपीट की स्थिति बन गई थी।

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