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लेखकों को अपने अवॉर्ड्स का सम्मान करना चाहिए: अकादमी अध्यक्ष

 नई दिल्ली 

13tiwari-300x228देश में बढ़ती असहिष्णुता के खिलाफ कुछ साहित्यकारों के ‘अवॉर्ड वापसी’ अभियान के तहत साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने के बाद अकादमी के अध्यक्ष डॉ. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने बुधवार को कहा कि लेखकों को जो पुरस्कार दिया जाता है उसका जरूर सम्मान करना चाहिए। साहित्य अकादमी की ओर से साल 2015 का साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार दिया गया। बुधवार को त्रिवेणी कला संगम, मंडी हाउस में हुए इस कार्यक्रम में साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. तिवारी की ओर से 23 भारतीय भाषाओं के युवा रचनाकारों को पुरस्कार दिए गए।

विश्वनाथ ने कहा कि कोई भी पुरस्कार या राशि तो वापस की जा सकती है मगर सम्मान कभी वापस नहीं किया जा सकता, यह खुद हासिल किया जाता है और समाज की इसमें खास भूमिका होती है।  तिवारी ने हिंदी में दिए गए अपने भाषण में कहा कि इस तरह के सम्मान समाज द्वारा स्वीकार्यता हैं और समाज की स्वीकार्यता के आधार पर साहित्य अकादमी जैसे संस्थान ये पुरस्कार देते हैं, जिसका हमारे लेखकों को सम्मान करना चाहिए।  वह बोले कि लेखक का दायित्व केवल बेहतर लिखना ही होना चाहिए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नामी मराठी लेखक विश्वास पाटिल ने युवा लेखकों को आने वाली चुनौतियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि उन्हें अपनी मन की बात सुननी चाहिए। अकादमी ने 14 नवंबर को मुंबई में बाल साहित्य में योगदान के लिए लेखकों को बाल साहित्य पुरस्कार 2015 से सम्मानित किया था। युवा पुरस्कार 35 साल से कम उम्र के 23 लेखकों को दिया गया है। इसमें 50 हजार रुपये का चेक और तांबे की एक पट्टिका शामिल है।

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