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शर्मनाक: हरियाणा के लोगों को बेटियों से ज्यादा बेटों की चाह

चंडीगढ़

girl-300x225इक्कीसवीं सदी में भी ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्हें बेटियों से ज्यादा बेटों की चाह है। हाल ही में एक एनजीओ द्वारा कराए गए सर्वे में खुलासा हुआ है कि हरियाणा के 90 पर्सेंट दंपती बेटी नहीं बल्कि बेटे चाहते हैं।  ‘ब्रेकथ्रू’ नाम के एनजीओ द्वारा कराए इस सर्वे से पता चला है कि हरियाणा के 90 पर्सेंट माता-पिता बेटियों से कहीं ज्यादा बेटों को तरहीज देते हैं। ब्रेकथ्रू महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा और भेदभाव जैसे मुद्दों पर काम करता है।

सर्वे हरियाणा के चार जिलों के स्कूलों और कॉलेजों में कराया गया था जिनमें पानीपत, झज्जर, सोनीपत और रोहतक के स्कूल,कॉलेज शामिल थे। यह सर्वे ब्रेकथ्रू की मुहिम ‘मिशन हजार’ का हिस्सा था। इस सर्वे का मकसद था जेंडर आधारित भेदभाव प्रसार और स्वस्थ लिंगानुपात के बारे में जागरूकता का प्रसार करना।  सर्वे के दौरान नौवीं कक्षा की स्टूडेंट सोनल ने कहा,’जब किसी परिवार में लड़के का जन्म होता है तो बाकायदा डीजे बुलाया जाता है और मिठाइयां बांटी जाती हैं।

लड़की का जन्म होने पर ये सारी चीजें नहीं की जाती हैं।’ सर्वे को दौरान यह भी सामने आया कि 89 फीसदी महिलाएं या तो गृहणी हैं या खेती के काम में हाथ बंटाती हैं। सिर्फ 11 फीसदी औरतें सगंठित क्षेत्र में काम करती हैं।  सर्वे में हिस्सा लेने वाले 66 फीसदी लोगों ने कहा कि सूरज ढलने के बाद औरतें घरों से बाहर नहीं दिखाई देती हैं।

ब्रेकथ्रू एनजीओ की डायरेक्टर सोनाली खान के मुताबिक,’घर से बाहर की दुनिया में औरतों की भागीदारी बहुत कम है।’ इस मुहिम का हिस्सा रहे संजय सिंह को उम्मीद है कि धीरे-धीरे लोगों में लोगों में जागरूकता बढ़ेगी और हालात बदलेंगे। हरियाणा में राज्य और केंद्र सरकार दोनों ही निराशाजनक लिंगानुपात को सुधारने की कोशिश कर रही हैं।

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