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खत्म हो सकती है ग्रैच्यूटी के लिए ‘5 साल की पाबंदी’

jpg-300x225प्राइवेट सेक्टर में काम करने वालों को अब ग्रैच्यूटी खोने के डर से कंपनी से ‘बंधे’ रहना नहीं रहना होगा, और वर्किंग वुमन 6 महीने की मैटरनिटी लीव पा सकेंगी। यह सब सरकार के उस प्लान से मुमकिन हो सकेगा, जिसमें उसने सभी एंप्लॉयीज बेनफिट्स को कंसॉलिडेट करने का फैसला किया है।  एक सीनियर ऑफिसर ने कहा कि सरकार देश में 40 करोड़ से ज्यादा वर्कर्स के बेनफिट्स बढ़ाने के लिए सोशल सिक्यॉरिटी लॉ में आमूलचूल बदलाव करने का प्लान बना रही है।

सरकार का फोकस देश में बिजनस करना आसान बनाना भी है। सरकार को लगता है कि उसके इन कदमों से दूसरे लेबर रिफॉर्म्स के लिए सपॉर्ट जुटाने में हेल्प मिलेगी।  लेबर मिनिस्ट्री सोशल सिक्यॉरिटी कोड को अंतिम रूप देने में जुटी है। सोशल सिक्यॉरिटी कानूनों को आसान बनाने के लिए इसमें आधे दर्जन कानूनों को मिला दिया जाएगा। सरकार जिन कानूनों को उदार बनाने पर काम कर रही है, उनसे वर्किंग वुमन को ज्यादा मैटरनिटी लीव मिलेगी और ग्रैच्यूटी पॉर्टेबल बन जाएगी।

गौरतलब है कि सोशल सिक्यॉरिटी कोड में जिस अहम कानूनों को मिलाया जाएगा उनमें एंप्लॉयीज प्रॉविडेंट फंड ऐंड मिसलेनियस प्रॉविजन ऐक्ट 1952, एंप्लॉयीज स्टेट इंश्योरेंस ऐक्ट 1948, एंप्लॉयीज कॉम्पेंसेशन ऐक्ट 1923, पेमेंट ऑफ ग्रैच्यूटी ऐक्ट 1972 और मैटरनिटी बेनफिट ऐक्ट 1961 है।

आधिकारिक सूत्र ने पहचान जाहिर नहीं किए जाने की शर्त पर कहा, ‘सरकार लेबर लॉ को इस तरह से आसान बनाने को लेकर प्रतिबद्ध है कि उससे वर्कर्स और एंप्लॉयीज दोनों को फायदा हो और वह एंप्लॉयर के लिए लागू करना भी आसान हो।’  मिनिस्ट्री ट्रेड यूनियंस, एंप्लॉयर्स के रिप्रेजेंटेटिव्स और सरकारी ऑफिसर्स के साथ मंगलवार को त्रिपक्षीय वार्ता करेगी। उसमें बताया जाएगा कि संबंधित कानूनों में किस तरह बदलाव किया जा रहा है कि वह सोशल सिक्यॉरिटी कवर बढ़ाए जाने के सरकार के विजन से मेल खाने लगे।

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