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मैगी बनाने वाली कंपनी पर केस, अमिताभ-प्रिटी-माधुरी के खिलाफ कोर्ट में याचिका

नई दिल्ली
maggi-noodles-300x225उत्तर प्रदेश फूड सेफ्टी और ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (UPFDA) की ओर से मैगी बनाने वाली कंपनी नेस्ले इंडिया और पांच अन्‍य पर मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। इनके खिलाफ बाराबंकी के फूड ऑफिसर वी. के. पांडे ने बाराबंकी के एसीजीएम-1 कोर्ट में फूड एंड सेफ्टी एक्ट 2006 की धारा 58 और 59 के तहत मुकदमा दर्ज कराया। उधर, शनिवार को बाराबंकी के सीजीएम कोर्ट में एक वकील ने मैगी का विज्ञापन करने वाले अमिताभ बच्चन, प्रिटी जिंटा और माधुरी दीक्षित के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए याचिका दायर की। कोर्ट में इस पर सुनवाई जारी है। याचिका दायर करने वाले वकील संतोष कुमार ने कहा है कि वह इन सितारों के खिलाफ आईपीसी की धारा 109, 272, 273, 420 के तहत मामला दर्ज कराना चाहते हैं।
अमिताभ, माधुरी और प्रिटी को फंसा सकती है आईपीसी की धारा 272
अगर मैगी का विज्ञापन करने के मामले में अमिताभ बच्चन, माधुरी दीक्षित और प्रिटी जिंटा पर आईपीसी की धारा 272 लगी तो उनकी मुसीबतें बढ़ सकती हैं। यह धारा मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचने की प्रक्रिया में शामिल होने से जुड़ी है। इसके तहत अधिकतम छह महीने की सजा प्रावधान है। लेकिन उत्तर प्रदेश ने इसमें संशोधन किए हैं। उत्तर प्रदेश में लगने वाली धारा 272 के तहत दोषी पाए जाने पर अधिकतम उम्र कैद की भी सजा हो सकती है।
क्‍यों हुआ मुकदमा
पिछले दिनों यूपी के बाराबंकी जिले से मैगी के 12 अलग-अलग सैंपल लेकर केंद्र सरकार की कोलकाता स्थित लैब में टेस्ट कराया गया। रिपोर्ट आई तो मैगी के इन पैकेटों में लेड की मात्रा 17.2 पार्ट्स प्रति मिलियन (पीपीएम) पाई गई है, यह स्‍वीकार्य सीमा से लगभग सात गुना ज्‍यादा है। FDA के डिप्‍टी इंस्‍पेक्‍टर जनरल डीजी श्रीवास्‍तव के मुताबिक, मैगी नूडल्‍स में लेड और मोनोसोडियम ग्‍लूटामैट (एमएसजी) की मात्रा खतरनाक स्‍तर पर पाई गई है। लेड की स्‍वीकार्य योग्‍य सीमा 0.01 पीपीएम से 2.5 पीपीएम के बीच है। FDA ने ये सारी जानकारी एक चिट्ठी लिख FSSAI को दी थी।
हो सकती है सात साल की सजा, 10 लाख रुपए तक जुर्माना
धारा 58 फूड मानकों के उल्लंघन के लिए है। इसमें 2 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। वहीं, धारा 59 अनसेफ फूड के लिए लगाई जाती है। इसके तहत दोषियों को अधिकतम 7 साल तक की सजा और 10 लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है।
मुकदमा किनके खिलाफ
बाराबंकी के फूड ऑफिसर वी. के. पांडे ने को बताया कि न्यू दिल्ली ईजीडे, नेस्ले इंडिया प्राइवेट लिमिटेड न्यू दिल्ली और ऊना (हिमाचल प्रदेश) में कंपनी के दफ्तर, ईजीडे के लाइसेंस धारक साहब आलम और ईजीडे के मैनेजर मोहन गुप्ता समेत छह पर मुकदमा दर्ज कर दिया गया है। सोमवार को कोर्ट इन सभी को सम्मन भेजेगी।
कोलकाता में टेस्ट का मैगी का दावा झूठा
नेस्ले इंडिया कंपनी द्वारा मैगी के सैंपल को कोलकाता लैब में टेस्ट करवाने का दावा झूठा साबित हुआ है। कंपनी ने दावा किया था कि उसने मैगी का एक पैकेट सैंपल जांच के लिए बाराबंकी के फूड ऑफिसर की मदद से कोलकाता की लैब में भिजवाया था, लेकिन बाराबंकी के फूड सेफ्टी ऑफिसर के मुताबिक कंपनी ने जांच कराने के लिए कोई आवेदन ही नहीं दिया।
माधुरी को मिल चुका है नोटिस
हरिद्वार फूड डिपार्टमेंट ने एक्ट्रेस माधुरी दीक्षित को ये नोटिस बतौर ब्रांड एंबेसडर एक प्रचार में मैगी को हेल्दी बताने के लिए दिया गया है। 15 दिन के अंदर नोटिस का जवाब न देने पर विभाग ने एडीएम कोर्ट में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की बात भी कही है। हरिद्वार के फूड सेफ्टी ऑफिसर दिलीप जैन का कहना है कि आटा मैगी के एक विज्ञापन में माधुरी ने ये गलत जानकारी फैलाई थी कि इसे खाने से 2 से 3 रोटी खाने के बराबर फाइबर मिलता है। साथ ही, शरीर हेल्दी रहता है। इस संबंध में जारी नोटिस में माधुरी से पूछा गया है कि उन्होंने किस आधार पर ये बाते कही हैं?
Yippee के भी लिए गए सैंपल, जांच के लिए भेजे जाएंगे लखनऊ लैब
मैगी के बाद येप्‍पी नूडल्स के भी सैंपल लिए गए हैं। आगरा में FDA ने येप्‍पी नूडल्‍स के पांच हजार पैकेट सीज कर लिए हैं। इसकी जांच लखनऊ के FDA लैब में होगी। चीफ फूड इंस्‍पेक्‍टर ने बताया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इसे रिलीज करने पर फैसला होगा।
सरकार ने दिए पूरे देश में जांच के आदेश
केंद्र सरकार की संस्था फूड सेफ्टी और स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने पूरे देश में मैगी की जांच के आदेश दे दिए हैं। 1 जून तक इसकी रिपोर्ट FSSAI को भेजनी है।
ये कहना है सरकार का
फूड और कंज्यूमर अफेयर्स मिनिस्ट्री के केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने कहा, “मैगी में MSG और लेड की भारी मात्रा होने की रिपोर्ट को सरकार गंभीरता से ले रही है। इन रिपोर्ट्स की जांच की जाएगी। जांच के परिणामों के आधार पर कंपनी पर उचित एक्शन लिया जाएगा।”
ये कह रही है मैगी बनाने वाली कंपनी
नेस्‍ले इंडिया के कॉरपोरेट कम्युनिकेशन हेड हिमांशु मांगलिक ने  को बताया, “हमने करीब 600 से ज्यादा सैंपल्स लेकर स्वतंत्र जांच के लिए मान्यता प्राप्त लैब में भेजा है। रिपोर्ट आते ही उसे सरकार और दैनिक भास्कर से शेयर किया जाएगा। उसी आधार पर आगे की स्ट्रैटजी बनाई जाएगी।”
क्या हैं केंद्र की कानूनी अड़चनें?
सरकार ने मैगी में लेड की ज्यादा मात्रा मिलने के मामले को गंभीरता से लिया है। उसने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिट ऑफ इंडिया से इस मामले पर विचार करने को कहा है। इसके अलावा उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निपटारा आयोग से भी कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। लेकिन इसमें कानूनी दिक्कतें यह हैं कि आयोग स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई नहीं कर सकता। वह तभी मुकदमा चलाने का निर्णय ले सकता है जब ‘क्लास एक्शन सूट’ दाखिल हो। यानी किसी संगठन या समूह के जरिए सामूहिक शिकायत दायर की जाए। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस डी.के. जैन का कहना है कि अब तक मैगी के खिलाफ हमें कोई शिकायत नहीं मिली है।
क्या है इसका हल?
सरकार को उपभोक्ता संरक्षण कानून 1986 में संशोधन करना होगा ताकि आम लोगों को कंपनियों के खिलाफ मुकदमा करने का अधिकार मिल सके। केंद्र कानून में संशोधन पर विचार कर रहा है। संसद के अगले सत्र में संशोधित बिल पेश किया जा सकता है।
अब तक 60 हजार लोग दे चुके हैं मैगी पर अपनी राय
मैगी से जुड़ी इस खबर पर दैनिक भास्कर के फेसबुक पेज पर 60 हजार से ज्यादा कमेंट आ चुके हैं। सबसे ज्यादा लोगों ने मैगी में MSG और लेड जैसे खतरनाक केमिकल होने के बाद भी अब तक सरकार की ओर से इस पर बैन न लगाने पर सवाल उठाया है। लोगों ने सरकार से पूरे देश में मैगी की जांच की मांग भी की है।

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