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सरकार और न्यायपालिका की विश्वसनीयता दांव पर: दिग्विजय

नई दिल्ली 

Shashi-Tharoor-300x224मुंबई सीरियल धमाकों के दोषी याकूब मेमन को फांसी दिए जाने पर कांग्रेस नेताओं शशि थरूर और दिग्विजय सिंह ने ट्विटर पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। शशि थरूर ने जहां फांसी दिए जाने को ‘नृशंस’ बताया है, वहीं दिग्विजय सिंह ने कहा है कि आतंक के अन्य मामलों को लेकर सरकार और न्यायपालिका की विश्वसनीयता खतरे में है।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ट्वीट किया है, ‘इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि मृत्युदंड प्रतिरोधक का काम करता है, तथ्य इसके उलट है। मृत्युदंड दरअसल एक तरह का प्रतिशोध है। यह सरकार की नाकामी है।’  उनका अगला ट्वीट है, ‘हमें आतंक का मुकाबला जरूर करना चाहिए, लेकिन नृशंस फांसी से दुनिया में कहीं भी आतंकवादी हमले नहीं रुके हैं।’

बाद में एक अन्य ट्वीट में थरूर ने सफाई देते हुए कहा कि वह किसी खास मामले की बात नहीं कर रहे। उन्होंने कहा कि यह तय करना कोर्ट का काम है, सवाल मृत्युदंड से सिद्धांत और इसकी व्यावहारिकता को लेकर है।  कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने याकूब मेमन को फांसी दिए जाने के फैसले को ‘मिसाल’ तो बताया है, मगर यह सवाल भी खड़ा किया है कि इस तरह का रवैया अन्य मामलों में क्यों नहीं अपनाया जाता।

उन्होंने ट्वीट किया है, ‘याकूब मेमन को फांसी हो गई। आतंक के एक आरोपी को सजा देने में सरकार और न्यायपालिका ने जिस तरह की तत्परता और प्रतिबद्धता दिखाई है, वह एक मिसाल है।’  अगले ट्वीट्स में उन्होंने लिखा है, ‘मुझे उम्मीद है कि सरकार और न्यायपालिका आतंक के अन्य मामलों में भी जाति, मत और धर्म के आधार को नजरअंदाज इसी तरह का कमिटमेंट दिखाएंगी। जिस तरह से आतंकवाद फैलाने के अन्य आरोपियों के मामले चल रहे हैं, मुझे उनपर शक है। सरकार और न्यायपालिका की विश्वसनीयता खतरे में है।’

आगे कलाम और याकूब का जिक्र करते हुए दिग्विजय ने लिखा है, ‘क्या संयोग है! भारत के दो मुसलमानों का अंतिम संस्कार आज ही हो रहा है। डॉक्टर कलाम, जिन्होंने भारत के लिए बहुत कुछ हासिल करके हर भारतीय को गर्व का अहसास करवाया और याकूब मेमन, जिसने आतंकवादी गतिविधियों में शामिल लोगों से जुड़कर पूरे समुदाय को शर्मिंदा कर दिया।’

आखिर में दिग्विजय ने लोगों से गांधीवादी बनने की अपील की है। उन्होंने ट्वीट्स में लिखा है, ‘यह सबक है हर भारतीय के लिए कि वे धार्मिक कट्टरता से दूर रहें, जो हिंसा और आतंकवाद की तरफ ले जाती है। उदार, सेक्यूलर और आधुनिक बनिए। आइए, हम पहले भारतीय बनें। नफरत और हिंसा का खात्मा करें। गांधीवादी बनिए। प्यार और अहिंसा की विचारधारा को अपनाइए और उसपर अमल भी कीजिए।’

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