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10 सबसे प्रदूषित शहरों में दिल्ली, इलाहाबाद और पटना: WHO

जिनेवा

pollution-300x225विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भारत के शहरों में बढ़ते प्रदूषण की चौंकाने वाली रिपोर्ट पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के दस सबसे प्रदूषित शहरों में ग्वालियर, इलाहाबाद, पटना, रायपुर और दिल्ली शामिल हैं। हर साल कई महीनों तक धूल भरी आंधी झेलने वाले ईरानी शहर जबोल को सबसे प्रदूषित माना गया है।

05 सबसे प्रदूषित शहरों में भारत के चार शहर, दिल्ली नौवें स्थान पर,  ईरानी शहर जबोल के बाद ग्वालियर, इलाहाबाद, पटना और रायपुर

शहर : पीएम 2.5 का स्तर(रैंकिंग)
जबोल(ईरान) : 217(1)
ग्वालियर : 176(02)
इलाहाबाद : 170(03)
पटना : 149(04)
रायपुर : 144(05)
दिल्ली : 122 (09)

दिल्ली की आबोहवा बेहतर हुई
दिल्ली : पीएम 2.5
2014 : 153 (01)
2016 : 122 (09)

दिल्ली में आया काफी सुधार
डब्ल्यूएचओ की सालाना रिपोर्ट में दिल्ली की बात करें तो उसने प्रदूषण से निपटने में बड़ी कामयाबी हासिल की है। वर्ष 2014 में उसे दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बताया गया था और दो साल बाद वह नौवें स्थान पर आ गया है।

कानपुर, लखनऊ और फिरोजाबाद भी शामिल
भारत के अन्य प्रदूषित शहरों में यूपी का कानपुर, लखनऊ और फिरोजाबाद, पंजाब में खन्ना, लुधियाना शामिल हैं। पहले की रिपोर्ट में भी इन शहरों की स्थिति गंभीर रही है।

डब्ल्यूएचओ ने भारत को सराहा
डब्ल्यूएचओ की स्वास्थ्य, पर्यावरण मामलों की निदेशक मारिया नीरा ने कहा कि भारत में प्रदूषण से निपटने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की है। इसमें स्मार्ट सिटी, सम-विषम, सीएनजी पर जोर जैसे दूरगामी और अस्थायी कदम शामिल हैं।

गरीब देशों पर ज्यादा मार
रिपोर्ट के मुताबिक, गरीब देशों के 98 फीसदी शहरों का वायु प्रदूषण के मामले में बुरा हाल है और वे पीएम 2.5 के मामले में डब्ल्यूएचओ के मानक से काफी नीचे हैं। हालांकि विकसित और विकासशील देशों के 44 फीसदी शहर इस पैमाने पर खरे उतरते हैं।

कैंसर और दिल की बीमारियों का कारण
हवा में घुले महीन कण पीएम 2.5 और पीएम 10 फेफड़ों के कैंसर, पक्षाघात, त्वचा के रोगों का कारण भी बनते हैं। साथ ही हार्ट अटैक की आशंका को भी बढ़ाते हैं।

क्या है पीएम 2.5
ये हवा में फैले सूक्ष्म खतरनाक कण हैं जो हमारे फेफड़ों में भी प्रवेश कर जाते हैं। उन्हें 2.5 माइक्रोग्राम से छोटे इन कणों को पर्टिकुलेट मैटर 2.5 या पीएम 2.5 कहा जाता है। प्रत्येक क्यूबिक मीटर हवा में पीएम 2.5 कणों का स्तर जानकर प्रदूषण का आकलन किया जाता है।  ‘संभव है कि ऐसे कई प्रदूषित शहर हों, जो हमारी सूची में नहीं हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि उन शहरों के पास प्रदूषण निगरानी का कोई पैमाना ही नहीं है।’- मारिया नीरा, जनस्वास्थ्य प्रमुख, डब्लयूएचओ

छोटे शहरों में भी खतरे की घंटी-  74 छोटे शहरों में 41 प्रदूषित
लोकसभा के इसी सत्र में सरकार ने माना है कि महानगर ही देश के द्वितीय श्रेणी के शहर भी खतरनाक प्रदूषण की जद हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक, द्वितीय श्रेणी के 74 शहरों में 41 भारी जल और वायु प्रदूषण का सामना कर रहे हैं। इन शहरों में निकले 26.86 करोड़ लीटर सीवेज में 10 % का ही रोजाना शोधन हो पाता है। यूपी, उत्तराखंड, झारखंड, बिहार, हिमाचल और पंजाब के शहर इसमें शामिल हैं।

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