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सिर्फ किस्मत कनेक्शन से टीम इंडिया फाइनल में कैसे पहुंच सकती थी?

नई दिल्ली

MUMBAI, INDIA - MARCH 31: Virat Kohli of India looks dejected after West Indies hit the winning runs during the ICC World Twenty20 India 2016 Semi Final match between West Indies and India at Wankhede Stadium on March 31, 2016 in Mumbai, India. (Photo by Ryan Pierse/Getty Images)टीम इंडिया की जीत का सपना संजोए कल देश को सवा अरब लोगों को उस वक्त निराशा हाथ लगी जब टीम इंडिया टी-20 विश्वकप के सेमीफाइनल में वेस्टइंडीज से हार गई। पर सवाल उठता है कि ये हार किस्मत के चलते हुई या फिर टीम इंडिया के आधे खिलाड़ियों के कुछ न कर पाने के चलते हुए। ये साफ है कि आप दो तरह से इस टूर्नामेंट को देख सकते हैं। सिर्फ एक बल्लेबाज और एक गेंदबाज के दम पर सेमाफाइनल तक पहुंच गए। क्या ये चौंकाने वाला नहीं था।

टीम इंडिया में शुरू से ही यह साफ दिखने लगा था कि कुछ ही खिलाड़ी खेल पा रहे थे। पूरी कहानी यही है। लगभग हर मैच में गेंदबाज नेहरा, बुमरा, अश्विन और बैटिंग में विराट कोहली के दम पर हम खेलते रहे। धोनी सही कप्तानी कर पाए। लेकिन आधी टीम के दम पर नहीं जीत सकते। इतिहास गवाह है कि बड़े टूर्नामेंटों में कम से कम 9 खिलाड़ी अच्छा न खेलें तो आप टूर्नमेंट नहीं जीत सकते। ऐसी स्थिति में सिर्फ दो खिलाड़ियों का खराब खेलना ही अफोर्ड किया जा सकता है। हमारे टॉप बैट्समैन युवी, रैना, शिखर नहीं खेल पाए। युवी आखिर मैच में बाहर हुए। रैना लगातार फ्लॉप रहे।

एक हाई प्रेशर मैच वानखेड़े में मानना पड़ा कि किस्मत ने साथ नहीं दिया। धोनी ने भी माना। लेकिन सवाल ये है कि कितनी बार किस्मत आपका साथ देगी। बांग्लादेश में दिया यहां नहीं दिया। अगर आप चैंपियन टीम हो तो आपको अपने दम पर भी खेलना पड़ेगा। स्पिनर आखिरी मैच में ग्रिप नहीं कर पा रहे थे। अश्विन, जडेजा कुंद हो गए। नहीं खेल पाए। दबाव पूरी तरह से दिख रहा था। अच्छी बात ये कि सिर्फ आधी टीम आपकी खेल रही थी फिर भी आप सेमीफाइनल तक पहुंचे।

बेशक हम एक कड़े मैच में न्यूजीलैंड से हार गए। लेकिन पाक के खिलाफ जो दम लगाना पड़ा। यही हाल आपका बांग्लादेश के साथ हुआ। उनको एशिया कप में हराकर आए। उसने यहां टीम इंडिया को नाकों चने चबवा दिए। यहां पर किस्मत ने आपका साथ दिया। उनकी बेवकूफी से जीते। ऑस्ट्रेलिया से मुकाबला कड़ा था। लेकिन वेस्टइंडीज की टीम हल्की टीम नहीं है। इनके सारे खिलाड़ी पूरी दुनिया में खेलते हैं। इनहें हल्के में लेना सही नहीं है। इनकी एक्सपर्टीज ही है टी-20 । फिर भी हम अच्छा खेले।

इस मामले में सलेक्टर्स को भी दोष देना सही नहीं है। सलेक्टर्स ने बेस्ट टीम चुनकर दी थी। बुमरा और नेहरा को सेलेक्टर्स ने ही निकाल कर दिया। युवी, रैना और दोनो ओपनर ही न चलें तो क्या हो सकता हैं। पांड्या, जडेजा ने मिलकर जितने रन बनाए उससे ज्यादा पिटाए। इसमें चयनकर्ता क्या कर सकते हैं। ऐसे में कप्तान, कोच क्या कर सकता है।

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