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एमपी: वक्त पर एम्बुलेंस नहीं मिलने से कलेक्टर की मां का निधन, बेटा बोला- मैं दोषी हूं

दमोह

dsc-300x195एमपी के दमोह कलेक्टर डॉ. श्रीनिवास शर्मा की मां शांतिदेवी काे शुक्रवार सुबह वेंटिलेटर वाली एम्बुलेंस वक्त पर नहीं मिलने से निधन हो गया। हार्टअटैक के बाद उन्हें दमोह से जबलपुर ले जाना था। दो घंटे की मशक्कत के बाद किसी तरह साधारण एम्बुलेंस मिली मगर जबलपुर पहुंचने से पहले ही उन्हाेंने दम तोड़ दिया। कलेक्टर कहते हैं -” यह पूरी व्यवस्था की बदइंतजामी का नतीजा है। इसके लिए पूरा सिस्टम जिम्मेदार है। शांतिदेवी 76 साल की थीं।

एमपी में दमोह जिले के कलेक्टर शुक्रवार सुबह करीब 10:45 बजे मां को लेकर हॉस्पिटल पहुंचे थे। पता चला कि वहां आईसीसीयू भी नहीं है। ओटी में ही इलाज शुरू किया गया। बाद में उन्हें जबलपुर रेफर किया जाना था। इसके लिए वेंटिलेटर वाली एम्बुलेंस फौरन जरूरी थी। वह छह माह से खराब थी। कलेक्टर काफी देर तक परेशान होते रहे। जबलपुर और सागर से एम्बुलेंस जुटाने की कोशिशें हुईं। आनन-फानन में सागर जिला हॉस्पिटल से एम्बुलेंस बुलाई गई, जो डेढ़ घंटे में तो दमोह ही पहुंची। जैसे-तैसे उन्हें जबलपुर हॉस्पिटल ले जाया गया। मगर रास्ते में ही मां ने आखिरी सांस ली। उनका अंतिम संस्कार शहडोल में किया गया।

कलेक्टर बेटे ने कहा- मैं दोषी हूं
इस बदइंतजामी से कलेक्टर डॉ. श्रीनिवास शर्मा खुद को दोषी मान रहे हैं। वह कहते हैं- ” कलेक्टर होने के नाते मैं भी दोषी हूं। वक्त पर एम्बुलेंस मिल जाती तो मां जीवित होतीं।” “जब कलेक्टर के साथ ऐसा हो सकता है तो आम आदमी का क्या होता होगा।”

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