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दक्षिणी सूडान: 13 सौ से अधिक महिलाओं का महीनों होता रहा रेप

जुबा

aa-04032015-19146-300x200साउथ सूडान में सरकार समर्थक मिलिशिया की तरफ से यातना का दिल दहलाने वाला वाकया सामने आया है। यहां बच्चों, विकलांगों को जिंदा जलाया गया और लड़ाकों को भुगतान में लड़कियां सौंपी गईं ताकि वे रेप कर सकें। यूनाइडेट नेशन की नई रिपोर्ट में ये सारे तथ्य सामने आए हैं। जांच में सिविल वॉर में शामिल सभी पक्षों को शामिल किया गया था। साउथ सूडान के सिविल वॉर में नागरिकों को टारगेट किया गया। इनकी हत्या की गई और व्यापक पैमाने पर रेप को अंजाम दिया गया। इस मामले में सबसे ज्यादा जुल्म आर्मी और सरकार समर्थक बलों ने ढाया। यूएन की रिपोर्ट में इसे दुनिया का सबसे भयानक मानवीय संकट करार दिया गया है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि जिसने भी यहां विपक्ष का समर्थन किया उनके साथ बेइंतहा अत्याचार किया गया। यहां तक कि बच्चों और विकलांगों को भी नहीं बख्शा गया। जिंदा जलाकर इनकी हत्या कर दी गई। यहां तक कि इन्हें कंटेनर्स में डालकर झुलसा दिया गया। नागरिकों को गोली मारी गई, फांसी के फंदे में झुला दिया गया और फिर शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए। शुक्रवार को जारी यूएन ह्यूमन राइट्स की रिपोर्ट में ये सारी बातें कही गई हैं।

1,300 से ज्यादा रेप के मामले केवल साउथ सूडान राज्यों में दर्ज किए गए हैं। तेल भंडार से संपन्न इस देश में पिछले साल पांच महीनों तक अराजकता की स्थिति थी। एक महिला ने यूएन इन्वेस्टिगेटर्स से कहा, ‘पहले मेरे कपड़े फाड़े गए फिर पांच सैनिको ने मेरे बच्चों के सामने सड़क के किनारे रेप किया। इसके बाद कई लोगों ने जंगल में मेरे साथ रेप किया। मेरे बच्चे भी गायब हो गए।’

विश्वसनीय सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि सरकार से जुड़े ग्रुपों को महिलाओं से रेप की अनुमति मिली थी। इन्हें रेप करने की छूट सरकार की वफादारी निभाने के एवज में थी। हालांकि विपक्षी ग्रुपों ने भी महिलाओं को शिकार बनाया।’

रिपोर्ट में बताया गया है कि रेप को सरकारी आर्मी ने विरोध को कुचलने के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। साउथ सूडान प्रेजिडेंशल प्रवक्ता अटेनी वेक ने इस बात से इनकार किया है कि सरकारी आर्मी ने जुल्म ढाए हैं। उन्होंने अलजजीरा से कहा, ‘एक जिम्मेदार सरकार के रूप में हम सारी रिपोर्ट को गंभीरता से लेंगे। मानवाधिकार के दमन की जितनी रिपोर्ट आई हैं हम उस आधार पर जांच को आगे बढ़ाएंगे। हालांकि हमारी आर्मी को सख्त हिदायत थी कि वह नागरिकों और उनके अधिकारों की रक्षा की जाए।’

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