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किसानों ने केंद्र का प्रस्ताव ठुकराया, कहा- बुराड़ी मैदान नहीं, ओपन जेल

नई दिल्ली

कृषि कानून 2020 के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों ने बुराड़ी जाने से मना कर दिया है. उनका कहना है कि बुराड़ी खुली जेल की तरह है. किसान संगठन भारतीय किसान यूनियन (क्रांतिकारी) पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष सुरजीत सिंह फूल ने कहा कि बातचीत के लिए रखी गई शर्त किसानों का अपमान है. हम बुराड़ी कभी नहीं जाएंगे. बुराड़ी ओपन पार्क नहीं है एक ओपन जेल है.

उन्होंने कहा कि हमने फैसला किया है कि हम बुराड़ी नहीं जाएंगे. हमें इस बात के साक्ष्य मिले हैं कि बुराड़ी ओपन जेल है. उत्तराखंड किसान संघ के अध्यक्ष से दिल्ली पुलिस ने कहा था कि उन्हें जंतर मंतर ले जाया जाएगा लेकिन उन्हें बुराड़ी मैदान में ले जाकर बंद कर दिया गया.

उन्होंने कहा कि, ” बुराड़ी जेल जाने की बजाए हम दिल्ली में एंट्री के पांच रास्तों का घेराव करेंगे. हमारे पास चार महीने का राशन है तो हमारे लिए चिंता की बात नहीं है. हमारी ऑपरेशन कमेटी आगे का फैसला लेगी.” उन्होंने कहा कि हम अपने मंच पर किसी भी राजनीतिक दल को जगह नहीं देंगे. फूल ने कहा कि हम लोग 2 महीने से आंदोलन कर रहे हैं चाहे वह कांग्रेस का हो या किसी भी पार्टी का हो, हम किसी को अपना मंच नहीं देंगे.

बता दें कि गृह मंत्री अमित शाह ने किसान संगठनों से 3 दिसबंर से पहले बातचीत का प्रस्ताव रखा था. अमित शाह ने कहा था कि ”अगर किसान यूनियन चाहते हैं कि भारत सरकार उनसे जल्द बात करे, 3 दिसंबर से पहले इनसे बात करे, तो मेरा आप सभी को ये आश्वासन है, जैसे ही आप लोग बुराड़ी मैदान में शिफ्ट हो जाते हैं, अपने आंदोलन को एक स्थाई जगह पर शिफ्ट करते हैं और अच्छे तरह से सेट हो जाते हैं तो दूसरे ही दिन भारत सरकार आपकी समस्या और मांगों को लेकर बातचीत के लिए तैयार है.”

उन्होंने अपील करते हुए कहा था कि, ” किसान यूनियन के सभी नेताओं से कहना चाहता हूं कि सभी किसान भाईयों से बातचीत करके उन्हें निर्देशित जगह पर आइए. भारत सरकार बात करेगी. वहां आप लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करिए. इससे किसानों को भी सुविधा रहेगी और सड़क पर आने जाने वाले लोगों को भी सुविधा रहेगी.”त चाहते हैं।

किसानों ने प्रस्ताव ठुकराया
किसानों ने कहा कि हम पूरी व्यवस्था के साथ यहां आए हैं। हमारे पास चार महीने का पर्याप्त राशन पानी है। उन्होंने कहा कि हम बुराड़ी मैदान में आंदोलन नहीं करेंगे हमको रामलीला मैदान या फिर जंतर मंतर पर आंदोलन करने की जगह सरकार को देनी चाहिए। गौरतलब है कि शनिवार को गृहमंत्री अमित शाह ने किसानों से अपील की थी कि वो दिल्ली के बुराड़ी इलाके में ही अपना आंदोलन करें और सरकार आपसे बातचीत के लिए तैयार है। जिसे किसान नेताओं से खारिज कर दिया है।

कृषि मंत्री ने की अपील
किसानों के कॉन्फ्रेंस करने के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भी प्रतिक्रिया दी है। तोमर ने कहा है कि भारत सरकार किसानों से तीन दौर की वार्ता कर चुकी है, चौथी बार तीन दिसंबर को मिलने का प्रस्ताव दिया था। सरकार हर स्तर पर खुले मन से बातचीत करने को तैयार है पर किसान यूनियन को बातचीत का माहौल बनाना चाहिए। उन्हें आंदोलन का रास्ता छोड़ चर्चा का रास्ता अपनाना चाहिए

गृहमंत्री अमित शाह की भी नहीं सुनी
किसान नेताओं ने कहा था कि गृहमंत्री अमित शाह को बातचीत के साथ शर्त नहीं रखनी चाहिए थी। हम बिना शर्त सरकार से बात रखना चाहते हैं। इसके बाद गृहसचिव अजय भल्ला ने मोर्चा संभाला है और किसानों से बातचीत का ऑफर दिया है। अब इस पर किसानों का क्या रुख होएगा ये देखने वाली बात होगी।

2.30 घंटे की बैठक में शाह का प्रस्ताव खारिज
इससे पहले, किसानों की बैठक में अमित शाह का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया। शाह ने प्रस्ताव दिया था कि सरकार किसानों से बातचीत के लिए तैयार है, बशर्ते किसान बॉर्डर से हटकर दिल्ली के बुराड़ी में निरंकारी समागम मैदान में प्रदर्शन करें। दिन के 11 बजे शुरू हुई बैठक करीब 2.30 घंटे चली। इस बैठक में गृह मंत्रालय की शर्त नहीं मानने का फैसला हुआ। किसानों का कहना है कि वो केंद्र सरकार से बिना किसी शर्त के साथ बातचीत चाहते हैं।

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