पैंगोलिन में मिला कोरोना जैसा वायरस, नए शोध में चेतावनी

पैंगोलिन में मिला कोरोना जैसा वायरस, नए शोध में चेतावनी

कोरोना वायरस इंसानों में कैसे फैला, दुनिया भर के वैज्ञानिक इस पहेली को सुलझाने में जुटे हुए हैं. चीन में कोरोना वायरस फैलने के बाद कहा जा रहा था कि चमगादड़ से ही कोरोना वायरस इंसानों में पहुंचा लेकिन फिर इसका शक आया पैंगोलिन पर. 26 मार्च को जर्नल नेचर में प्रकाशित हुए एक शोध में इस बात की पुष्टि हुई है कि कोविड-19 से मिलता-जुलता कोरोना वायरस पैंगोलिन जानवर में मौजूद है.

चमगादड़ के अलावा कोरोना वायरस के परिवार से संक्रमित होने वाला पैंगोलिन इकलौता स्तनपायी जीव बन गया है. इस स्टडी में सीधे तौर पर यह तो नहीं निष्कर्ष नहीं निकाला गया है कि मौजूदा महामारी के लिए पैंगोलिन ही जिम्मेदार है लेकिन इसमें संकेत दिए गए हैं कि नए कोरोना वायरस के पैदा करने में इस जानवर की अहम भूमिका हो सकती है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, चमगादड़ों के कोरोना वायरस SARS-CoV के वाहक होने की सबसे ज्यादा संभावना है लेकिन इंसानों में आने से पहले ये किसी अन्य प्रजाति में पहुंचा होगा. यानी कोरोना वायरस चमगादड़ से पहले किसी जानवर में पहुंचा होगा और उस जानवर से इंसानों में.

पैंगोलिन एक संकटग्रस्त, विशाल और चींटी खाने वाला स्तनपायी है जो एशिया और अफ्रीका में पाया जाता है. इंटरनेशनल यूनियन फॉर द कंजरवेशन में पैंगोलिन के संरक्षण की जिम्मेदारी संभाल रहे डैन चैंडलर ने बताया, पैंगोलिन कोरोना वायरस के वाहक माने जाते हैं. ये हैरान करने वाला नहीं है कि कोरोना वायरस के स्रोत को समझने के लिए सबकी नजरें पैंगोलिन पर टिक गई हैं.

हालांकि, पैंगोलिन की 8 प्रजातियों की कमर्शियल बिक्री पर पूरी तरह से बैन है लेकिन इसके बावजूद दुनिया भर में पैंगोलिन की सबसे ज्यादा तस्करी होती है. पारंपरिक चीनी औषधियों के लिए हजारों पैंगोलिन की हर साल तस्करी होती है. चीन, वियतनाम और एशिया के कुछ देशों में इसके मांस को स्टेटस सिंबल से भी जोड़कर देखा जाता है. कोरोना वायरस शरीर के द्रव्य, मल और मांस से आसानी से फैल सकता है. इसलिए खाने के लिए पैंगोलिन का इस्तेमाल ज्यादा चिंता की बात है. पैंगोलिन को इसकी स्कैल्स के लिए भी मारा जाता है लेकिन उसके संपर्क में आना मांस की तुलना में कम खतरनाक है.

चीन में, पैंगोलिन खाना गैर-कानूनी है लेकिन यहां तमाम रेस्टोरेंट के मेन्यू में इसे पाया जा सकता है. पैंगोलिन 26 जनवरी तक जिंदा जानवरों के बाजार में बेचा जा रहा था. कोरोना वायरस फैलने के बाद सरकार ने बाजार को बंद करने का आदेश दिया.नए रिसर्च में पाया गया है कि पैंगोलिन में पाए गए कोरोना वायरस की जीन संरचना मौजूदा कोरोना वायरस की जीन संरचना से 88.5 फीसदी से लेकर 92.4 तक फीसदी मेल खाता है.

2017 और 2018 में स्मग्लिंग के खिलाफ ऑपरेशन में जब्त किए गए 18 सूंडा पैंगोलिन से टिश्यू सैंपल लिए गए. शोधकर्ताओं ने कोरोना वायरस की मौजूदगी का पता लगाने के लिए टेस्ट किया. उन्होंने पाया कि 18 पैंगोलिन में से 5 के सैंपलों में कोरोना वायरस पाए गए. वैज्ञानिकों ने इसके बाद इन वायरसों के जीनोम संरचना की तुलना SARS-CoV-2 से की.

अपने निष्कर्ष में सावधानी बरतते हुए शोधकर्ताओं ने कहा कि जीनोम की समानता यह साबित करने के लिए काफी नहीं है कि पैंगोलिन ने ही SARS-CoV-2 को चमगादड़ों से इंसानों में पहुंचाया. हालांकि, इसे खारिज भी नहीं किया गया है. पेपर में कहा गया है कि पैंगोलिन को भी भविष्य में आने वाले किसी नए कोरोना वायरस के संभावित वाहकों की सूची में रखा जाना चाहिए.

पैंगोलिन को बचाने के लिए एनजीओ चलाने वाले पॉल थॉमसन कहते हैं, इस वैश्विक संकट का एक साफ संदेश है कि भविष्य में ऐसी महामारी रोकने के लिए पैंगोलिन की बाजार में बिक्री बंद की जानी चाहिए.चैंडलर ने लिखा, मैं इस स्टडी का स्वागत करता हूं. पैंगोलिन में मौजूद इन वायरसों पर और रिसर्च होनी चाहिए. SARS-CoV-2 के संक्रमण को इंसानों में फैलाने की क्षमता रखने वाली बाकी प्रजातियों को लेकर भी शोध किए जाने चाहिए. वैज्ञानिकों और वन्यजीव संरक्षकों का कहना है कि हमें इस गलती से सबक लेते हुए इन जानवरों की तस्करी रोकनी चाहिए और इन्हें खाना बंद करना चाहिए ताकि फिर से ऐसी त्रासदी का सामना ना करना पड़े.

Leave a Reply