‘क्यूबा मॉडल’ में ऐसा क्या? इटली को कोरोना से उबारेगा

‘क्यूबा मॉडल’ में ऐसा क्या? इटली को कोरोना से उबारेगा

रोम

स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में ‘क्यूबा मॉडल’ का उदाहरण अक्सर दिया जाता है। जब दुनिया पर कोरोना का खतरा मंडराया तो क्यूबा पहले की तरह इस बार भी मदद को आगे आया। चाहे इम्युनिटी बढ़ाने वाली उसकी जादुई दवा या विशेषज्ञ डॉक्टर क्यूबा हर स्तर पर आगे बढ़कर संक्रमित देशों की मदद में जुटा है। वेनेजुएला, निकारागुआ, जमैका, सूरीनाम और ग्रेनेडा के बाद उसने अपनी मेडिकल टीम इटली भेजी है जहां कोरोना से सबसे अधिक मौत हुई है। यह बताना महत्वपूर्ण है कि कोरोना के केंद्र चीन में जब स्वास्थ्य विभाग इससे निपटने की तैयारी कर रहा था तो चाइनीज नैशनल हेल्थ कमिशन ने जिन 30 दवाइयों का सुझाव दिया था उनमें क्यूबा का इन्टरफेरोन अल्फा-2बी भी शामिल है। इसे इम्युनिटी बढ़ाने के लिए जाना जाता है।

इटली की मदद को क्यूबा ने दौड़ा दिए डॉक्टर
इटली में उत्तरी प्रांत लॉम्बार्डी सबसे अधिक संक्रमित है और जब यहां के हालात नियंत्रण से बाहर हो गए तो इटली ने क्यूबा से मदद की अपील की। कोरोना का इलाज मौजूद न होने की स्थिति में इटली को क्यूबा की याद इसलिए भी आई क्योंकि इसके पास एक से बढ़कर एक वर्ल्ड क्लास डॉक्टर और दवाई मौजूद है। क्यूबा ने 53 सदस्यों की टीम इटली भेजी है। कोरोना वायरस को रोकने के लिए दुनिया के अलग-अलग देशों में वह छह मेडिकल टीमें भेज चुका है।

कोरोना से क्यूबा भी है डरा, पर 6 देशों में डटे हैं उसके डॉक्टर्स
क्यूबा ने पहली बार इटली में अपनी टीम भेजी है क्योंकि इटली खुद अपनी बेहतरीन स्वास्थ्य सेवा के लिए जाना जाता है। लेकिन कोरोना के सामने उसकी एक न चली। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इटली से पहले क्यूबा की मेडिकल टीम वेनेजुएला, निकारगुआ, जमैका, सूरीनाम और ग्रेनेडा में डटे हुए हैं। डॉक्टर्स आईसीयू एक्सपर्ट लियोनार्डो फर्नांडीज ने बताया, ‘हम भी डरे हुए हैं, लेकिन संकट की इस घड़ी में लोगों की मदद करना हमारा क्रांतिकारी कर्तव्य है। . इसलिए हम अपने डर को उतारकर बाहर फेंक दिया है।’ क्यूबा खुद भी कोरोना से पीड़ित है और 35 मामलों की पुष्टि हो चुकी है और 954 नागरिकों पर नजर रखी गई है। वहीं, फर्नांडीज कहते हैं,’जिसे डर नहीं लगता, वो सुपरहीरो होते हैं, लेकिन हम सुपरहीरो नहीं हैं, हम क्रांतिकारी डॉक्टर हैं।’

इम्यूनिटी बढ़ाने वाली क्यूबा की वो चमत्कारिक दवा
वहीं मेडिसिन की बात करें तो क्यूबन इंटरफेरोन अल्फा-2बी किसी जादू की तरह काम करता है। यह विभिन्न प्रकार के वायरस संबंधित रोगों के इलाज में कारगर भी साबित हुआ है। क्यूबा के मेडिकल विशेषज्ञों के मुताबिक, यह मरीज में वायरस के असर को रोकता है और गंभीर बीमारी का इलाज करता है। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में क्यूबा दुनिया के टॉप-5 देशों में शामिल है। चाहे मेडिसिन हो या इसके हॉस्पिटल या डॉक्टर, सभी वर्ल्ड क्लास हैं। यहां स्वास्थ्य व्यवस्था की बात करें तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी तीन मंजिली इमारत में चलते हैं। जिनमें डॉक्टर और नर्स के लिए रहने की भी सुविधा होती है यानी मरीज को जरूरत हो तो डॉक्टर हमेशा मौजूद रहे।

1981 की डेंगू महामारी को जब क्यूबा ने हराया
1981 में जब डेंगू की महामारी फैली तो यही अल्फा-2बी इंटरफेरोन कारगार साबित हुआ। उस दौरान अकेले क्यूबा की 3.4 लाख आबादी संक्रमित हुई थी। इससे 180 लोगों की मौत हो गई थी। डेंगू को प्रभावी रूप से रोकने में क्बूया के स्वास्थ्य मंत्रालय ने अल्फा-2बी के इस्तेमाल को मंजूरी दी और इसने वाकई में अपना असर दिखाया। लाखों लोग इससे प्रभावित हुए लेकिन मौत के मामले उस अनुपात में कम थे। 1988 में लगातार छह साल की कड़ी मेहनत के बाद उसने मेनिनजाइटिस टाइप बी का वेक्सिन तैयार कर लिया था। इस बीमारी का पहला केस सामने आते ही वह उसके वेक्सिन को ढूंढने में जुट गया था क्योंकि टाइप ए और सी के लिए वेक्सिन उपलब्ध थी लेकिन बी के लिए दुनिया में कोई वेक्सिन नहीं थी। इसकी एक वजह यह थी कि 1984 में मेनिनजाइटिस टाइप बी क्यूबा के लिए गंभीर बीमारी बन गई थी।

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